ब्लोगोत्सव के बाद की इस परम्परा में आज प्रस्तुत है देश के एक बहुचर्चित ओज कवि श्री हरिओम पवार की कविता : भारत का इतिहास .....इस विडिओ में कवि ने यह कहने का साहस जुटाया है कि कैसे एक ही कर्म के लिए इतिहास ने दो विशेषण दिए ...कैसे भारतीय इतिहास को अपने ढंग से लिखने का स्वांग रचा इस पुरुष प्रधान समाज ने ....और कैसे अपने शिष्य का अंगूठा काटने वाला शिक्षक महान कहलाया ....आदि !


2 comments:

Ranjan ने कहा… 15 जून 2010 को 4:42 pm

bahut sundar... hari on panwar said it very correctly... we should be raising finger on our so called heros...

शंकर फुलारा ने कहा… 15 जून 2010 को 5:54 pm

श्री हरिओम पंवार को कई बार स्वामी रामदेव जी के मंच पर कविता करते सुना है | बहुत ओजपूर्ण कविता करते हैं | निर्भीकता और सच बोलने में कोई डर नहीं होता ये उनकी विशेषता भी है | प्रस्तुत कविता भी बहुत अच्छी लगी |
धन्यवाद

 
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