उत्सव गीत-

() माला
(ब्लॉग :मेरा भारत महान)



हम हैं ब्लोगर हिंदी के, आगाज करने आए  हैं !

चिट्ठाकारी में नया इतिहास रचने आए  हैं !!



सुर, तुलसी और मीरा है यहाँ के कुंजों में

अक्षय है भण्डार यहाँ वाणी का सूफी संतों में

कवि जायसी,मल्लिक खुसरो,भक्त कवि रसखान सा -

हम भी लेखन से सृजन में सांस भरने आए  हैं .



हम हैं ब्लोगर हिंदी के, आगाज करने आए  हैं !

चिट्ठाकारी में नया इतिहास रचने आए  हैं !!



अजान-वन्दना-गुरुवाणी भी है हिंदी के चिट्ठों में

गंगा-जमुनी संस्कृति की धाराएं है पन्नों में

ग़ालिब भी हैं और मीर भी, गांधी भी हैं बीच मेरे -

ब्लॉग-जगत में बस यही एहसास भरने आए  हैं



हम हैं ब्लोगर हिंदी के, आगाज करने आए  हैं !

चिट्ठाकारी में नया इतिहास रचने आए  हैं !!



यहाँ संस्कृति के संगम में छिपा हुआ एकात्म जगत

अनेक ब्लॉग व नेक हृदय, यही है अभिनव भाव प्रणव

परिकल्पना ने इसी कड़ी को उत्सव का है नाम दिया-

हम सब मिलकर उत्सव में विश्वास भरने आए  हैं



हम हैं ब्लोगर हिंदी के, आगाज करने आए  हैं !

चिट्ठाकारी में नया इतिहास रचने आए  हैं !!
 
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8 comments:

पूर्णिमा ने कहा… 19 अप्रैल 2010 को 6:50 pm

har roj ek naya utsav geet, aapane sachmuch itihas rach diya hai ....dheron badhayiyan !

गीतकार /geetkaar ने कहा… 19 अप्रैल 2010 को 6:57 pm

बहुत सुंदर उत्सव गीत, बधाइयाँ !

ajit gupta ने कहा… 20 अप्रैल 2010 को 10:46 am

अच्‍छे गीत के लिए बधाई।

नीरज गोस्वामी ने कहा… 20 अप्रैल 2010 को 11:00 am

बहुत खूब लिखा है माला जी ने...बधाई
नीरज

दिगम्बर नासवा ने कहा… 20 अप्रैल 2010 को 4:34 pm

बहुत हो सुंदर उत्सव गीत है ... बधाई इस गेट के लिए माला जी को ... और आपको सफल आयोजन के लिए ...

अक्षिता (पाखी) ने कहा… 20 अप्रैल 2010 को 10:19 pm

बहुत सुन्दर गीत !!
______________
'पाखी की दुनिया' में इस बार माउन्ट हैरियट की सैर करना न भूलें !!

संगीता पुरी ने कहा… 21 अप्रैल 2010 को 6:09 am

बहुत सुंदर गीत ..

रश्मि प्रभा... ने कहा… 21 अप्रैल 2010 को 1:42 pm

यहाँ संस्कृति के संगम में छिपा हुआ एकात्म जगत

अनेक ब्लॉग व नेक हृदय, यही है अभिनव भाव प्रणव

परिकल्पना ने इसी कड़ी को उत्सव का है नाम दिया-

हम सब मिलकर उत्सव में विश्वास भरने आए हैं

बहुत ही सार्थक, प्रिय गीत

 
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