रविकांत पांडे वर्त्तमान में वेहद सक्रीय और समर्पित युवा चिट्ठाकारों में से एक हैअपने बारे में ये कहते हैं कि "दुनिया पूछती है मैं कौन हूँ? मेरा भी मुझसे यही सवाल है।" इनका प्रमुख ब्लॉग है - कुछ शब्दप्रस्तुत है उनका एक मनमोहक गीत -


!! मुझको याद तुम्हारी आती !!

मुक्ति दिलाकर अंधियारे से
आकर पूरब के द्वारे से
सरसों के फूलों से हंसकर
धूप सुबह की जब बतियाती
मुझको याद तुम्हारी आती

नदी-तीर से थोड़ा हटकर
खड़ा शिवाले से जो सटकर
जब-जब उस पीपल के नीचे
सोनचिरैया गीत सुनाती
मुझको याद तुम्हारी आती

पावस से तरुणाई पाकर
मुझको अपने पास बुलाकर
बिठा गोद में जब-जब धरती
माथे केसर तिलक लगाती
मुझको याद तुम्हारी आती

मन के तुलसी चौबारे पर
पुष्पहार से थाल सजाकर
होते शाम सुहागिन कोई
जब-जब संध्या-दीप जलाती
मुझको याद तुम्हारी आती

4 comments:

ललित शर्मा ने कहा… 28 अप्रैल 2010 को 3:39 pm

मन के तुलसी चौबारे पर
पुष्पहार से थाल सजाकर
होते शाम सुहागिन कोई
जब-जब संध्या-दीप जलाती
मुझको याद तुम्हारी आती ।

सुंदर गीत-रविकांत जी को शुभकामनाएं

संगीता पुरी ने कहा… 28 अप्रैल 2010 को 4:28 pm

मुक्ति दिलाकर अंधियारे से
आकर पूरब के द्वारे से
सरसों के फूलों से हंसकर
धूप सुबह की जब बतियाती
मुझको याद तुम्हारी आती
बहुत खूब !!

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने कहा… 28 अप्रैल 2010 को 11:48 pm

सरस गीत. आनंद मिला. बधाई.

 
Top