हिंदी जगत की  श्रेष्ठ सर्जक  संगीता सेठी  की रचनाएँ राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पत्रिकाओं और समाचार पत्रों मे प्रकाशित हो चुकी हैं। युनिप्रतियोगिता मे कई बार इनकी कविताएँ शीर्ष दस कविताओं मे शुमार रही हैं । इनकी कविताओं में नया विंब और नयी प्रयोगधर्मिता प्रतिबिम्बित होती है . प्रस्तुत है इनकी कविता -



!! प्रार्थनाएं !!

मैंने बोई प्रार्थनाएँ

उस बीज के लिए

मैंने सींची प्रार्थनाएं

उस कोंपल के लिये

मैंने पौषी



प्रार्थनाएं

उसके चटकने तक

मैंने गाई प्रार्थनाएं

उसके खिलने तक

मैंने गुनी प्रार्थनाएं

उसके बढ़ने तक

मैंने ध्याई प्रार्थनाएं

उसके फलने तक

मैंने समाधि प्रार्थनाएं

ब्रह्माण्ड के पोर-पोर में

समाने तक

() संगीता सेठी
 
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8 comments:

रश्मि प्रभा... ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 4:37 pm

इन प्रार्थनाओं की गूँज, अनुगूँज व्यापक होगी

हिमांशु । Himanshu ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 5:57 pm

सुन्दर कविता ! आभार !

मनोज कुमार ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 8:20 pm

कविता का बाना पहन कर सत्य और भी चमक उठता है।

sangeeta swarup ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 8:37 pm

बहुत श्रृद्धा से की गयी प्रार्थनाएं....अच्छी प्रस्तुति

nilesh mathur ने कहा… 23 अप्रैल 2010 को 11:07 pm

कमाल का लिखा है, बहुत अच्छा !

Sadhana Vaid ने कहा… 24 अप्रैल 2010 को 6:33 am

आशा है आपकी प्रार्थनाएं भरपूर पुष्पित पल्लवित होकर लहलहा रही होंगी और आपकी मनोकामना फलीभूत अवश्य हुई होगी ! तथास्तु !

Akhtar Khan Akela ने कहा… 13 सितंबर 2010 को 4:33 pm

vaah bhnji aapki gzb ki prarthnaayen hen bhut khub he aapi prarthnaa plz aap meri bhi svikar kro prarthnaa. akhtar khan akela kota rajsthaan ki post pdhen or ashirvaad den. akhtar khan akela kota rajsthan

 
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