इसी क्रम में अब सुनिए बहुचर्चित हास्य कवि श्री आश करण अटल 
के स्वर में उनकी हास्य कविता : आशिक की पिटाई और कवियों की गबाही ....



पुन: परिकल्पना पर वापस जाएँ

1 comments:

mala ने कहा… 5 मई 2010 को 7:46 pm

बहुत बढ़िया

 
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