नमस्कार,
 मैं मालविका हूँ !
एक क्लासिकल सिंगर ...देश- विदेश में मैंने कई बड़े शोज किये हैं
विगत दिनों जब सा रे ग  मा  के लिए सोनू निगम ने अपनी प्रस्तुति दी थी उसमें मेरी भी सहभागिता थी, मैं उस्ताद बिरजू महाराज और उनके शिष्यों  के साथ कत्थक की प्रस्तुति की है .मैंने कई महत्वपूर्ण अवसरों पर एकल और द्वय गायन किया है . मेरा एक म्यूजिक एलबम " छंद काव्य" भी प्रसारित है .मैंने बच्चों को संगीत भी सिखाया है. कुछ वोर्कशोप्स भी कंडक्ट की हैं....!


मैं इस ब्लॉग उत्सव से अनायास ही आकर्षित हुई हूँ .
आपको नहीं मालूम कि यह उत्सव कितना लोकप्रिय हो गया है . ब्लॉग जगत के बाहर भी इसकी खूब चर्चा हो रही है. यह सब देखकर मेरी भी इच्छा हुई है कि इस एतिहासिक  क्षण का साक्षी बनूँ  लेकिन क्या करूँ मैं  हिंदी में ब्लोगिंग नहीं करती  ! मेरी इस समस्या का समाधान किया है रवीन्द्र प्रभात जी ने ....उन्होंने मुझसे कहा है कि आप उत्सव में शामिल हो सकती हैं यदि अब से ब्लोगिंग करना शुरू कर दें  !   



 मैं ब्लोग्गिंग तो नही करती पर इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिये जरूर ब्लॉग बनाऊँगी , वह भी हिंदी में, आप से मेरा वादा है !

 अभी के लिये मैं अपना गाया और लिखा एक गीत भेज रही हूँ, जिसका संगीत मेरे एक मित्र, पुनीत जोशी ने दिया है. पुनीत के साथ मैंने बैंगलोर में काफी शोस किये हैं.


गीत: एक नया दिन चला.

इक नया दिन चला, ढूँढने कुछ नया
मिलेगा क्या , किसे खबर , नहीं फिकर , नहीं पता.
मैंने तो चाहा आसमान ही मेरा हो , पर वो बन के सपना ही रहा
और जब मै जागूं , एक नया सवेरा हो , पर ना पाई वैसी एक सुबह
हो ... फिर भी ना जानूँ , ये अरमाँ क्यूँ जगे हैं
पा लूंगी उनको , जिनको सपनो में जिया ...

क्या पता, कब आयेगा, जाने क्या, संग लायेगा
मीठा सा था, ये इंतज़ार, मुझको कोई बतलायेगा..

अनजानी राहें , चल पडीं मुझे लेकर , इक सफ़र पे जानूं ना कहाँ
मुड़ के जो देखा , जाने सब कहाँ छूटा , सपनों का मेरा वो जहाँ
अबके दिल चाहे , उनको कह दूं अलविदा
अलबेले दिन की होगी अलबेली अदा ...
चुन के वो , जो लायेगा , जानूं मै वो भायेगा
मिल जाएगी , मुझको कोई, जीने की फिर ...मीठी वजह ...


मैंने बस इक ही अन्तरा गया है (दूसरा वाला).

कैसा लगा और कोई सुझाव हो तो बताइयेगा.
धन्यवाद,
मालविका.












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   और अब मैं आप सभी के समक्ष प्रस्तुत करने जा रही हूँ हिंदी सिनेमा के
कुछ चुनिन्दा गाने "  मालविका लाईव " के अंतर्गत......  



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21 comments:

mala ने कहा… 7 मई 2010 को 5:16 pm

ये बढ़िया रहा.

पूर्णिमा ने कहा… 7 मई 2010 को 5:19 pm

ब्‍लॉग उत्‍सव समृद्धित्‍व को प्राप्‍त हुआ है।

गीतकार /geetkaar ने कहा… 7 मई 2010 को 5:22 pm

बहुत बढ़िया,प्रस्तुती के लिए धन्यवाद !

राजेश उत्‍साही ने कहा… 7 मई 2010 को 5:24 pm

ब्‍लाग की दुनिया में इस नए प्रयोग के लिए बधाई और शुक्रिया।

shashisinghal ने कहा… 7 मई 2010 को 5:34 pm

बहुत अच्छा लगा । मैंने मालविका को आज पहली बार सुना क्योंकि मैं टी वी देखती नहीं हूं इस्लिए पता ही नहीं होता कि कहां क्या हो रहा है । वास्तव में मैं एक अच्छी आवाज सुनने से महरूम थी । आज सुनकर मजा आ गया ।
गीत - एक नया दिन चला - तो ऎसा लगता है जैसे उत्सव परिकल्पना के लिए ही लिखा गया हो । ये लाइनें " अनजानी राहें , चल पडीं मुझे लेकर , इक सफ़र पे जानूं ना कहाँ
मुड़ के जो देखा , जाने सब कहाँ छूटा , सपनों का मेरा वो जहाँ
अबके दिल चाहे , उनको कह दूं अलविदा
अलबेले दिन की होगी अलबेली अदा ...
चुन के वो , जो लायेगा , जानूं मै वो भायेगा
मिल जाएगी , मुझको कोई, जीने की फिर ...मीठी वजह ...” काफी अर्थपूर्ण हैं । हकीकत में हम जब निराश होते हैं तभी जिंदगी की राहें जीने की कोई न कोई मीठी वजह ले ही आती हैं और हम फिर से जिंदगी में रम जाते हैं । बहुत सुंदर गीत है ।
परिकल्पना उत्सव में शामिल होने के लिए मालविका को बहुत - बहुत धन्यबाद । साथ में रविन्द्र जी के अथक प्रयासों की सफलता के लिए मुबारकबाद । आशा करती हूं कि रविन्द्र जी जिस मुकाम को लेकर चले थे परिकल्पना के रूप में उसे और प्रसिद्धि मिले ।

INDRADHANUSH ने कहा… 7 मई 2010 को 5:45 pm

मालविका जी आज पहली बार आपको सुना अच्छा लगा!

girish pankaj ने कहा… 7 मई 2010 को 5:58 pm

''parikalpana'' ney jaisi parikalpana ki thee, usase behatar aayojan ho gayaa. prabhat ji...apki mehanat rang lai. badhai..

अविनाश वाचस्पति ने कहा… 7 मई 2010 को 7:57 pm

शुक्रिया मालविका जी ब्‍लॉगोत्‍सव 2010 को गायनोत्‍सव की बेमिसाल जुगलबंदी से सराबोर करने के लिए। ब्‍लॉगोत्‍सव ही पूरा हो गया है अलबेला। फिल्‍मी गीतों के मुखड़ों से चित्रात्‍मक नये बिम्‍ब भर दिए हैं। मन खूब मुदित हो गया है।

anupam mishra ने कहा… 7 मई 2010 को 8:08 pm

उम्दा...

नरेन्द्र व्यास ने कहा… 7 मई 2010 को 9:29 pm

बहुत सुन्‍दर प्रस्‍तुति । श्री रवीन्‍द्र प्रभात और श्री अविनाश सर की परिकल्‍पना में आपने अपने सुमधुर स्‍वरों और अपनी मुखरित वाणी से एक मूर्त रूप दे दिया हो । ये फ्यूजन बहुत खूबसूरत बन पडा है । हार्दिक बधाई और परिकल्‍पना और मालविका जी को ।।

Amar Pratap Singh ने कहा… 7 मई 2010 को 10:03 pm

blog utsav 2010 blog jagat mein mile ka pathar sabit ho raha hai jiske liye Ravindr prabhaat badhai k patr hain lekin blog utsav 2010 ko dekhne k baad yah bhi mehsoosh hota hai kii hindi blog jagat Asiayi samaj ki visheshtaon se apne ko alag nahi kar pa raha hai. Asiyai samaj ki mukhy visheshta hai ki taang kheencho acche kaam ko protsahit mat karo. main Blog Utsav 2010 ki kamna karta hoon.

ललित शर्मा ने कहा… 8 मई 2010 को 5:16 pm

बहुत बढिया रविन्द्र जी

मालविका जी एवं आपको ढेर सारी शुभकामनाए

Vinay Prajapati 'Nazar' ने कहा… 8 मई 2010 को 5:37 pm

बहुत ही मंझी हुई कलाकार हैं

वृंदा ने कहा… 8 मई 2010 को 5:38 pm

हार्दिक बधाईयाँ, मालविका को।

Belu ने कहा… 11 मई 2010 को 11:38 am

आप सभी को ढेर सारा धन्यवाद्:). बहुत प्रोत्साहना मिली!

E-Guru Rajeev ने कहा… 14 मई 2010 को 8:20 pm

सुमधुर प्रस्तुति
आनंददायक :)

हिमांशु । Himanshu ने कहा… 27 मई 2010 को 7:35 am

इस मधुर प्रस्तुति ने परिकल्पना को एक नया आयाम दिया..एक रिक्त की पूर्ति की !
सुन्दर प्रस्तुति ! आभार ।

 
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