समापन समारोह के बाद अचानक उत्पन्न खामोशी से हतप्रभ कतिपय मित्रों/शुभचिंतको के मेल प्राप्त होने का सिलसिला मुझे इस पोस्ट के लिए प्रेरित किया, फलत: मुझे ब्लोगोत्सव से संबंधित सार्वजनिक टिप्पणी  हेतु बाध्य होना पडा . दरअसल ब्लोगोत्सव केवल उत्सव ही नहीं पारस्परिक प्रेम का प्रस्तुतिकरण था .....एक प्रयोग था जिसके सफल होने न होने के कयास ब्लॉग जगत में लगाए जाते रहे और निर्वाध  गति से यह उत्सव  पौने दो महीने तक चलता रहा .....कई उपलब्धियों को अंगीकार करते हुए यह प्रगति का नया कीर्तिमान बनाने में कामयाब हुआ है ......यदि इसे हिंदी ब्लॉग जगत में सफलता की हनुमान कूद कहा जाए तो शायद न कोई अतिश्योक्ति होगी और न कोई शक की गुंजायश ही .

   समय की प्रतिबद्धता के कारण कई रचनाकारों की रचनाएँ इस उत्सव में शामिल नहीं हो पायी है, जिसका मुझे खेद है......हलांकि उन रचनाकारों की रचनाएँ शामिल करने का दबाब लगातार बना हुआ है ....समापन के बाद की इस खामोशी का एक बड़ा कारण यह भी है .

  कुछ लोगों के द्वारा मेल से भेजे गए सुझाव में यह कहा गया है कि ब्लोगोत्सव के कुछ सुनहरे पल को फिर से प्रसारित किया जाए तथा समापन समारोह की भव्यता को टूकड़ों में प्रस्तुत कर पाठकों अथवा श्रोताओं के लिए सहज ग्राह्य बनाया जाए ! साथ ही समापन समारोह की प्रस्तुति के क्रम में ऑडियो एरर आ जाने के कारण भारी संख्या में श्रोतागण मनोहारी गीतों का आनंद लेने से अचानक बंचित हो गए उनकी तथा स्वर कोकिलाओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए उसे पुन: प्रसारित किया जाए !

   हम आभारी हैं अपने ब्लोगोत्सव के समस्त सलाहकारों/ रचनाकारों/ चिट्ठाकारों और शुभचिंतकों  का जिनके सहयोग से यह असंभव सा प्रतीत होने बाला उत्सव संभव में परिवर्तित हुआ !

  हम आपकी भावनाओं का पूरे अंत:मन से सम्मान करते हैं और ब्लोगोत्सव की बची हुई ख़ुशी की तलाश करने हेतु दो-चार दिनों का समय लेते हुए पुन: उपस्थित होने का आश्वासन देते हैं उसके बाद हम लोकसंघर्ष परिकल्पना सम्मान की घोषणा करेंगे जिन्हें आगामी दिसंबर में आयोजन हेतु प्रस्तावित अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव-२०१० में किसी अति विशिष्ट व्यक्ति के कर कमलों से समानित करेंगे ....इस दिशा में कार्यवाही सुनिश्चित की जा रही है !

 आप हमारे साथ विश्वास बनाए रखें हम शीघ्र उपस्थित होंगे पुन:एक नयी परिकल्पना के साथ !
आपका-
रवीन्द्र प्रभात

17 comments:

पूर्णिमा ने कहा… 5 जून 2010 को 10:12 pm

आपने इस ब्लागोत्सव को सार्थक बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोडी है
हमारी हार्दिक मंगल कामनाएं

mala ने कहा… 5 जून 2010 को 10:13 pm

हम आपकी भावनाओं का पूरे अंत:मन से सम्मान करते हैं...मंगल कामनाएं

'अदा' ने कहा… 5 जून 2010 को 10:31 pm

aapne aur rashmi ji ne is samaroh ke aayojan aur safalta ke liye athak krayaas kiya...aur sach poochiye to yah bahut safal raha..
ham sabhi aapke hriday se aabhari hain...

M VERMA ने कहा… 5 जून 2010 को 10:33 pm

आपका यह सद्प्रयास कौन भूल पायेगा. जो मनोयोग आपने समर्पित किया वह अनुकरणीय है.
सादर

संगीता पुरी ने कहा… 5 जून 2010 को 11:37 pm

आपने बहुत अच्‍छा प्रयास किया .. और उसमें आपको सफलता भी मिली है .. रही बात सभी लेखकों के संतुष्टि की .. तो वैसा कर पाना तो किसी के लिए असंभव ही है !!

महफूज़ अली ने कहा… 6 जून 2010 को 12:01 am

आपका यह सद्प्रयास कौन भूल पायेगा. जो मनोयोग आपने समर्पित किया वह अनुकरणीय है.
सादर...

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा… 6 जून 2010 को 12:30 am

क्षेत्रवाद,प्रतिष्ठा, अहम् इन सभी बातों को दरकिनार रख एकजुट होकर इस ब्लोग जगत को सँवारा जा सकता है। उत्सव आयोजित करना भी इसके लिये महत्वपूर्ण है। बहुत अच्छा।

Udan Tashtari ने कहा… 6 जून 2010 को 5:27 am

पूरा विश्वास बना हुआ है और इन्तजार कर रहे हैं. :)

अनेक शुभकामनाएँ.

अविनाश वाचस्पति ने कहा… 6 जून 2010 को 6:05 am

पुर्नप्रस्‍तुति, रविन्‍द्र प्रभात जी, मानने के लिए आभार। जो उत्‍सव का आनंद नहीं ले पाएं हैं, वे इसका आनंद ले सकते हैं और भविष्‍य में शामिल भी हो सकते हैं।

आचार्य जी ने कहा… 6 जून 2010 को 6:42 am

आईये जानें .... मन क्या है!

आचार्य जी

Arvind Mishra ने कहा… 6 जून 2010 को 7:04 am

यह एक अनूठा अनुष्ठान था ...सम्पूर्ति समापन पर मेरी बधाई स्वीकार करें !

honesty project democracy ने कहा… 6 जून 2010 को 7:32 am

आपका प्रयास प्रेरक,ब्लॉग को सार्थक बनाने वाला,सराहनीय और सद्भावना से परिपूर्ण रहा है ,इसे जारी रखिये और आपके आगे के सुन्दर प्रयास की प्रतीक्षा है ,शुभकामनाये |

'उदय' ने कहा… 6 जून 2010 को 8:16 am

...बधाईंया व शुकामनाएं !!!

गीतकार /geetkaar ने कहा… 6 जून 2010 को 10:27 am

आपका यह सद्प्रयास कौन भूल पायेगा ?बधाई स्वीकार करें !

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 6 जून 2010 को 3:30 pm

आपका ये उत्सव सच ही निराला था...अभी तक स्मृतियों में ताज़ा है....

लोकसंघर्ष का अंक मुझे प्राप्त हो गया है...

शुभकामनायें

Deepak Shukla ने कहा… 6 जून 2010 को 3:50 pm

Hi..

Es karykram ke safaltapurn samapan par meri badhai sweekar karen.. Aage hone wale har utsav par hum bhi bhagidar bane yahi abhilasha hai..

Shubhkamnaon sahit..

Saadar..

DEEPAK..

 
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