टर्म इंश्योरेंस (Term Insurance) बहुत जरुरी है पर ये लोगों को पसंद नहीं है, क्योंकि वो इसे पैसे की बर्बादी मानते हैं, वो सब लोग गलत हैं क्यों ? आइये देखते हैं

टर्म इंश्योरेंस में जमा किये हुए धन से वापिस कुछ नहीं मिलता है इस कारण से ज्यादातर लोग इसे पसंद नहीं करते हैं मेरा मानना है की यह एक मनोवैज्ञानिक कारण है क्योंकि "टर्म इंश्योरेंस की अवधि पूरा होने पर वापिस कुछ नहीं मिलता है" और तो और अगर अवधि पूर्ण होने के बाद अगर पैसा मिल भी जाए तो कोई ज्यादा फर्क नहीं पड़ता टर्म इंश्योरेंस न लेना एक बहुत बड़ी बेबकूफी है

लोगों की समस्या क्या है की वे टर्म इंश्योरेंस लेना ही नहीं चाहते हैं ?
लोगों को टर्म इंश्योरेंस इसलिए पसंद नहीं है क्योंकि अगर टर्म इंश्योरेंस की पूरी अवधि मे उन्हें कुछ नहीं होता है तो जितना भी बीमे की किश्त उन लोगों ने भरी है वह फालतू ही गई और उसका उन्हें कोई फायदा भी नहीं हुआ वास्तविकता मे ये लोग टर्म इंश्योरेंस के महत्त्व को नहीं समझते हैं अब हम इसे दूसरे तरीके से देखते हैं, मान लीजिये की टर्म इंश्योरेंस की जमा किश्तें अवधि समाप्त होने के बाद मिल जाती हैं। हम एक सामान्य परिवार के मामले का अध्ययन करते हैं।

तुषार 28 साल का नौजवान है और उसकी बस अभी शादी हुई है। वह लगभग 40,000 रुपये प्रति माह कमाता है। उसके महीने के सारे खर्च लगभग 25,000 रुपयों में हो जाते हैं और वह लगभग 15,000 रुपये प्रतिमाह बचाता है। उसका परिवार भी आर्थिक रुप से उसके ऊपर निर्भर है जिसमें उसके माता व पिता हैं । अभी उसकी सेवानिवृत्ति में ३० वर्ष बाकी हैं। उसने अपनी बीमा की आवश्यकताओं की गणना की जो कि कम से कम लगभग 50-60 लाख होती है। अभी हम 50 लाख गणना के लिये लेकर चलते हैं।

विश्लेषण
अब मजे की बात, उसके वर्तमान खर्चे लगभग 25 हजार हैं, लेकिन जब वो 30 साल बाद सेवानिवृत्त होगा तब उसके महीने का खर्चा क्या होगा ? जैसे पिछले 30 वर्षों का मुद्रास्फ़ीति दर 6.5 % रहा है (पिछले आंकड़ों पर आधारित), अब मान लें कि अगले 30 वर्षों में भी मुद्रास्फ़ीति की दर औसतन 6.5 % ही रहती है। 30 वर्ष बाद उसका मासिक खर्च लगभग 25,000 x (1.065)^30 = 1,65,359 (1.65 लाख) होगा। यदि वह शुरु से ही टर्म इंश्योरेंस लेता है 50 लाख का, तो उसकी सालाना बीमा किश्त लगभग 12,293 रुपये होती है 30 साल की अवधि के लिये HDFC Standard Life Insurance में।

बीमा किश्त की गणना व तुलना आप यहाँ कर सकते हैं।

इसका मतलब कि वह कुल 3.68 लाख रुपये की किश्तें बीमा के रुप में देगा, और अगर यह किश्तों में जमा की गई रकम उसे मिल भी जाती है तो उसे कितना फ़ायदा होगा, वह कितने महीने का खर्चा उससे चला सकता है 2 महीने या ज्यादा से ज्यादा 3 महीने, क्योंकि उस समय उसका मासिक खर्च लगभग 1.65 लाख होगा। बस इतना ही !!

तो शायद अब इन प्रश्नों को करने की आवश्यकता है -
आप अपने परिवार को वित्तीय जोखिम में डाल रहे हैं क्योंकि आपको 2 महीने के बराबर के खर्च की रकम वापिस नहीं मिल रहा है ?
एक छोटी सी रकम जो कि आपको अवधि पूर्ण होने के बाद नहीं मिलेगी, उसके लिये अपने परिवार को जोखिम में डालने का बचपना कर रहे हैं।
क्या आप यह नहीं सोचते हैं कि आप टर्म इंश्योरेंस को गलत नजरिये से देख रहे हैं ?
आप इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं कि “आपको क्या मिल रहा है” बजाय इसके कि “आपको क्या नहीं मिल रहा है”।
हमारे पास बीमा किश्त वापसी वाले बीमा पहले से ही हैं, पर वे किसी बेबकूफ़ी से कम नहीं, क्योंकि ये बीमा आम आदमी की कमजोरी का फ़ायदा उठाते हुए बनाये गये हैं और उनके लिये जो लोग टर्म इंश्योरेंस को पैसे की बर्बादी मानते हैं क्योंकि उसमें अवधि पूर्ण होने के बाद रकम वापिस नहीं मिलती है।

भारत के लोगों द्वारा टर्म इंश्योरेंस न पसंद करने के कारण
अधिकतर लोग केवल स्पष्ट रुप से आँकड़ों पर ध्यान केंद्रित करते हैं, जैसे कि उन्हें बीमा किश्त में जमा रकम वापिस नहीं मिलेगी या अगर उन्हें कुछ नहीं हुआ तो ये पैसे की बर्बादी होगी, लेकिन वे लोग टर्म इंश्योरेंस के आंतरिक फ़ायदों के बारे में सोच ही नहीं पाते हैं।
हम धन के साथ बहुत भावुक होते हैं, हम इस बात पर अपना ध्यान लगाते हैं कि हमारा धन बढ़ता रहे और फ़िर बाद में वह वापिस भी मिल जाये जबकि हम यह नहीं सोचते कि वह धन हमारी जिंदगी को कितनी सुरक्षा प्रदान करता है।
अधिकांश लोग सोचते हैं कि मरने की संभावनाएँ बहुत कम होती हैं, औसतन लोगों की उम्र लंबी होती है पर यह फ़िर से एक बेबकूफ़ाना सोच है। हम बुरी स्थिति की कल्पना करना ही नहीं चाहते हैं इसलिये हम इस ओर ध्यान ही नहीं देते हैं।

निष्कर्ष
जिंदगी में हम बहुत सारी बातों पर ध्यान ही नहीं देते हैं जैसे कि स्वास्थ्य, खुशी के पल, प्रकृति, अपनों के साथ बिताया गया समय जो कि सबसे सुन्दर है और जिंदगी की सच्चाई भी है। टर्म इंश्योरेंस व्यक्तिगत वित्त क्षेत्र के समान ही है, बस जरुरत है तो अपना ध्यान “आप क्या खो रहे हैं” से “आप क्या पा रहे हैं” पर केन्द्रित करने की, आप एक बार टर्म इंश्योरेंस ले लेंगे तो आपकी जिंदगी और भी सुन्दर हो जायेगी।

आप इस बारे में क्या सोचते हैं क्या आप मेरी बातों से सहमत हैं, कृपया टिप्पणी देकर बताये क्या ऐसी मानसिकता के शिकार हैं आप भी ? क्या आपको मेरी ये श्रंखला पसंद आ रही है, आप और भी इस विषय पर पढ़ना चाहते हैं तो टिप्पणी करके बताईये।
() विवेक रस्तोगी

4 comments:

kshama ने कहा… 12 जून 2010 को 11:19 pm

Vivek ji,
Is post ko dobara,itminaan se padhna hoga....jo samajh me aaya utna to logical lagta hai..

संगीता पुरी ने कहा… 12 जून 2010 को 11:41 pm

विवेक रस्‍तोगी जी को पढती रहती हूं .. बहुत अच्‍छी जानकारी दी इन्‍होने !!

निर्मला कपिला ने कहा… 14 जून 2010 को 4:37 pm

बहुत अच्छी जानकारी है धन्यवाद।विवेक जी का भी और आपका भी। शुभकामनायें

पूर्णिमा ने कहा… 14 जून 2010 को 5:49 pm

बहुत अच्‍छी जानकारी दी है ,धन्यवाद विवेक जी !

 
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