श्रीमती संगीता स्वरुप जी को ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने परिकल्पना पर प्रकाशित एक टिप्पणी को वर्ष की श्रेष्ठ टिप्पणी की संज्ञा देते हुए उन्हें "वर्ष की श्रेष्ठ महिला टिप्पणीकार" के रूप में अलंकृत किया है ......."जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत आईये जानते हैं उनके बारे में विस्तार से और पूछते हैं कुछ प्रश्न उनकी रचनाशीलता और हिंदी चिट्ठाकारी के बारे में .......



(१) आपका पूरा नाम ?

संगीता स्वरुप
(२) आपके पति का नाम ?

श्री प्रशांत स्वरुप

आपका जन्म स्थान ?


रूडकी
(३) आपका ई मेल का पता ?

sangeetaswarup@gmail.com


(४) आपका प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग ?


http://geet7553.blogspot.com/
(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :
http://www.parikalpnaa.com/2010/05/blog-post_10.html
http://utsav.parikalpnaa.com/2010/04/blog-post_2709.html
http://newobserverpost.blogspot.com/2009/11/blog-post_13.html
http://newobserverpost.blogspot.com/2009/
http://www.samaydarpan.com/november/kavita1.aspx
http://www.blogger.com/http://saptrangiprem.blogspot.com/2010/04/blog-post_13.html
http://saptrangiprem.blogspot.com/2010/06/blog-post_07.html
http://www.blogger.com/http://navgeetkipathshala.blogspot.com/2010/05/blog-post_03.html
http://www.taauji.com/2010/04/blog-post_06.html
http://www.hindisahityamanch.com/2010/05/blog-post_14.html
http://www.hindisahityamanch.com/2010/05/blog-post_256.html
http://www.hindisahityamanch.com/2010/05/blog-post_2552.html
http://www.hindisahityamanch.com/2010/05/blog-post_27.html
http://nicenice-nice.blogspot.com/2010/02/blog-post_5512.html
http://nicenice-nice.blogspot.com/2010/02/blog-post_24.html
http://nicenice-nice.blogspot.com/2010/05/blog-post_29.html
http://saraspaayas.blogspot.com/2010/06/blog-post_18.html
http://saraspaayas.blogspot.com/2010/04/blog-post.html ttp://saraspaayas.blogspot.com/2010/03/blog-post_04.html
http://saraspaayas.blogspot.com/2010/02/blog-post_7446.html
http://charchamanch.blogspot.com/

(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है ?

वैसे तो बहुत से ऐसे ब्लोग्स हैं जिनकी मैं नियमित पाठिका हूँ..लेकिन मुझे हर ब्लॉग पर कुछ भी रचनात्मक हो अच्छा लगता है...
(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
सामजिक , राजनैतिक विषयों पर कटाक्ष...और ख़्वाबों की दुनिया बहुत आकर्षित करती है.
(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?
ब्लॉग तो मैंने २००७ में बना लिया था...पर नियमित लिखना २००८ से शुरू किया है .
(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?
जैसे सारा आसमां मुट्ठी में हो ... :):)
(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?
ब्लोगिंग से आवश्यक कामों में अवरोध नहीं होता...हाँ आवश्यक काम से ब्लोगिंग में अवरोध ज़रूर होता है ...:):)
यदि होता तो उसे कैसे प्रबंध करती ?
प्राथमिकताएं पहले है...बाकी सब बाद में ..

(११)ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?
इस उत्सव में शामिल होना बहुत बड़ी उपलब्धि है...इस मंच पर बहुत अनुभवी लोग थे...उसमें मुझे भी शामिल किया तो नि:संदेह अच्छा लग्न ही है .
(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?
ब्लोगोत्सव एक विशेष आयोजन था...एक ही मंच पर बहुत कुछ जानने और सीखने को मिला...और सबसे बड़ी बात कि हर विधा कि रचनाएँ मिलीं...और जिस तरह से इसका मंचन हुआ..बेहद पसंद आया .
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?
कभी कभी रचनाएँ एक साथ जल्दी प्रकाशित होती थीं ...यदि उस दिन छूट जाता था तो पढनी मुश्किल हो जातीं थीं .वैसे ऐसी कोई विशेष कमी नहीं लगी जिसको इंगित किया जा सके .
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?
ऐसे तो कहना मुश्किल है कि किसने सबसे ज्यादा आकर्षित किया..क्यों कि सबकी अपनी अलग पहचान है...और सच तो यह है कि मुझे सभी कुछ बहुत अच्छा लगा.
(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?
मेरी नज़र में ऐसा कोई नहीं है ....
(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
यदि ऐसा संभव हो तो....क्यों कि इसके आयोजन में बहुत मेहनत और वक्त लगता है....लेकिन ऐसे
आयोजन से रचनाकार जुडते हैं....रचनात्मकता बढती है....हम तो ज़रूर चाहेंगे कि ऐसे आयोजन प्रतिवर्ष हों
(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?
मुझे अभी बहुत वक्त तो नहीं हुआ है हिंदी ब्लोगिंग में आये हुए इसलिए खेमेबाजी की बात पर कुछ कहना उचित नहीं होगा...और मैं स्वयं में स्वतंत्र रूप से हर ब्लॉग पर जो इच्छा होती है पढ़ती हूँ और टिप्पणियां करती हूँ . पर हाँ पिछले दिनों कुछ ऐसी पोस्ट ज़रूर आयीं जिनसे नकारात्मकता का सन्देश जाता है...
(१८) क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?
यह सब नहीं होना चाहिए....स्वस्थ स्पर्धा होनी चाहिए
(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :
मैंने १९७४ में स्नाक्तोतर (M.A. economics) किया था...१९७५ में B.Ed.
1973-74 में मेरठ यूनिवर्सिटी की टेबल - टेनिस टीम की कैप्टिन रह चुकी हूँ और १९७४ में यू० पी० चैम्पियन शिप भी जीत चुकी हूँ . कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यकर्मो में बहुत बार भाग लिया था...
कुछ समय केन्द्रीय विद्यालय में अध्यापन का कार्य भी किया..पर परिवार के लिए नौकरी छोड़ दी...
दो बच्चे हैं.एक बेटा और एक बेटी....दोनों का विवाह भी हो चुका है और अपनी ज़िंदगी में खुश हैं...
पति २००७ में हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड से निदेशक के पद से सेवानिवृत हुए ....अब हम सेवानिवृत जीवन का आनंद ले रहे हैं ....
(२०) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहती हैं ?
ऐसा कोई संस्मरण नहीं बस इसमें आना ही एक संयोग मात्र है....
(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ : (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो का प्रयोग भी कर सकती हैं )
ऑडियो में कुछ कठिनाई है....अत: एक रचना यहाँ दे रही हूँ ....

!! स्वयं सिद्धा बन जाओ !!

नारी -
तुम कब खुद को जानोगी
कब खुद को पहचानोगी ?


कुंठाओं से ग्रसित हमेशा
खुद को शोषित करती हो
अपने ही हाथों से खुद की
गरिमा भंगित करती हो


पुरुषों को ही लांछित कर
खुद को ही भरमाती हो
पर मन के विषधर को
स्वयं ही दूध पिलाती हो


घर - घर में नारी ही
नारी से द्वेष भाव रखती है
अपनी वर्चस्वता रखने को
हर संभव प्रयास करती है


नारी ही नारी की शोषक
कितना विद्रूप लगता है
पर ये खेल तो ना जाने
कितनी सदियों से चलता है


जिस दिन तुम नारी बन
नारी का सम्मान करोगी
उसके प्रताडित होने पर
उसके लिए दीवार बनोगी


उस दिन ये समाज तुम्हारी
महा शक्ति को पहचानेगा
दीन - हीन कहलाने वाली को
अपने सिर माथे पर रखेगा .


दूसरे को कुछ कहने से पहले
स्वयं में दृढ़ता लाओ
नारी का आस्तित्व बचाने को
स्वयं सिद्धा बन जाओ.....


बहुत बहुत धन्यवाद आपका संगीता जी आपने अपना अनमोल समय दिया ब्लोगोत्सव में .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।

आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद रविन्द्र जी आपने बहुत मेहनत की है इस दिशा में ...!

प्रस्तुति : रवीन्द्र प्रभात

25 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 12:21 pm

संगीता जी, आपके बारे में जानकर अच्छा लगा।
इस सम्मान हेतु बधाई स्वीकारें।
--------
ये साहस के पुतले ब्लॉगर।
व्यायाम द्वारा बढ़ाएँ शारीरिक क्षमता।

mala ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 12:25 pm

संगीता जी को बहुत बहुत बधाइयाँ।

पूर्णिमा ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 12:30 pm

बहुत बहुत बधाइयाँ।

kshama ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 12:33 pm

Sangita ji,bahut,bahut badhayi ho...aapka saakshatkaar bhi bada hee pasand aaya!

सूर्यकान्त गुप्ता ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 1:00 pm

आदरणीया संगीता जी को हमारा नमस्कार। ब्लॉग की दुनिया है दूर दूर रहते हुए भी हम निकटता अनुभव करने लगते हैं। संगीता जी की लेखनी अत्यंत सहज सरल एवम प्रभावी है्। प्रत्यक्ष साक्षात्कार तो नही हुआ है किंतु महज उनकी तस्वीर से ही उनका व्यक्तित्व झलकता है। मेरे लिये श्रद्धेय हैं। उन्हे इस सम्मान के लिये हार्दिक बधाई एवम ढेरों शुभकामनायें।

रश्मि प्रभा... ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 1:14 pm

बहुत बहुत बधाई...इन पंक्तियों को सार्थकता दे दी है-

दूसरे को कुछ कहने से पहले
स्वयं में दृढ़ता लाओ
नारी का अस्तित्व बचाने को
स्वयं सिद्धा बन जाओ.....

अविनाश वाचस्पति ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 2:42 pm

स्‍वयंसिद्धा बन जाओ
नहीं
स्‍वयंसिद्धा बन गई हैं
माननीया संगीता जी।

वन्दना ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 3:23 pm

संगीता जी को हार्दिक बधाई और शुभकामनायें।

गीतकार /geetkaar ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 4:41 pm

संगीता जी को बहुत बहुत बधाइयाँ।

खुशदीप सहगल ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 6:51 pm

संगीता जी की साहित्य-साधना ही ब्लॉगिंग का सच्चा स्वरूप है...सम्मान के लिए बहुत बहुत बधाई...

रवींद्र जी और ब्लॉगोत्सव टीम २०१० का आभार...

जय हिंद..

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 7:07 pm

दूसरे को कुछ कहने से पहले
स्वयं में दृढ़ता लाओ

सत्य. हार्दिक बधाई!

अनामिका की सदायें ...... ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 7:11 pm

आदरणीय संगीता जी को बहुत बहुत बधाई जो आज उनको इस सम्मान से नवाज़ा गया. इसके लिए रविन्द्र प्रभात जी भी बधाई के पात्र हैं जिन्होंने ऐसे हीरे को ढूंढ निकला. सच में संगीता जी बहुत मेंहनत
करती आई हैं जो उन्हें श्रेष्ट टिप्पणीकार का सम्मान मिला है. वो हमेशा ही से मेरी बहुत अच्छी मार्गदर्शक और गुरु रही हैं. उनकी इस सफलता के लिए में तहे दिल से बधाई देती हूँ.

और उनकी रचना स्वयं सिद्धा उन पर ही पूर्णरूप से खरी उतरती है.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 7:41 pm

आप सभी का हार्दिक धन्यवाद....अपने बारे में आप सब के विचार जान कर अभिभूत हूँ ....
सभी का साथ यूँ ही मिलता रहेगा ..इसी कामना के साथ

संगीता

girish pankaj ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 8:05 pm

aapke sneh ka kayal hu mai. aapki chhavi se gahari aatmeeyata tapakati hai. blog-jagat mey aap jaisi vidushi mahila ka hona achchh sanket hai. aapko sammaan mila to behad khushi hui.

Udan Tashtari ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 9:17 pm

बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ.

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 10:18 pm

गिरीश जी , समीर जी ,

आभार , आप सबका बहुत स्नेह मिला है....मैं कृतज्ञ हुई...आभार

शोभना चौरे ने कहा… 24 जुलाई 2010 को 11:43 pm

बहुत अच्छा लगा आपके बारे में जानना |आपके विचार और आपकी ब्लाग पर उपस्थिति बहुत प्रोत्साहन देते है \
बधाई एवम शुभकामनाये |

वाणी गीत ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 4:58 am

तुम स्वयंसिद्धा बन जाओ ...सुन्दर कविता
संगीता जी को बहुत बधाई ...!

रावेंद्रकुमार रवि ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 6:43 am

संगीता जी को मेरी तरफ से
संगीतमय बधाई!

Mrs. Asha Joglekar ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 8:40 am

संगीता जी बहुत बहुत बधाई । आपकी कविता बी मुझे बहुत पसंद आई ।
खास कर ये लाइने
जिस दिन तुम नारी बन
नारी का सम्मान करोगी
उसके प्रताडित होने पर
उसके लिए दीवार बनोगी


उस दिन ये समाज तुम्हारी
महा शक्ति को पहचानेगा
दीन - हीन कहलाने वाली को
अपने सिर माथे पर रखेगा .

Mrs. Asha Joglekar ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 8:40 am

संगीता जी बहुत बहुत बधाई । आपकी कविता बी मुझे बहुत पसंद आई ।
खास कर ये लाइने
जिस दिन तुम नारी बन
नारी का सम्मान करोगी
उसके प्रताडित होने पर
उसके लिए दीवार बनोगी


उस दिन ये समाज तुम्हारी
महा शक्ति को पहचानेगा
दीन - हीन कहलाने वाली को
अपने सिर माथे पर रखेगा .

Mrs. Asha Joglekar ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 8:40 am

संगीता जी बहुत बहुत बधाई । आपकी कविता बी मुझे बहुत पसंद आई ।
खास कर ये लाइने
जिस दिन तुम नारी बन
नारी का सम्मान करोगी
उसके प्रताडित होने पर
उसके लिए दीवार बनोगी


उस दिन ये समाज तुम्हारी
महा शक्ति को पहचानेगा
दीन - हीन कहलाने वाली को
अपने सिर माथे पर रखेगा .

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 9:15 am

संगीता जी से परिचय पाकर अच्छा लगा.

शिवम् मिश्रा ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 2:02 pm

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं!

दिगम्बर नासवा ने कहा… 25 जुलाई 2010 को 7:23 pm

संगीता जी को बहुत बहुत बधाइ ...

 
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