परिकल्पना ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम के द्वारा भोपाल निवासी श्री प्रमोद तांबट को वर्ष का श्रेष्ठ लेखक (हिंदी चिट्ठाकारी से संवंधित आलेख हेतु ) के रूप में चयनित करते हुए उन्हें सम्मानित करने का निर्णय लिया है ...."जानिये अपने सितारों को " के अंतर्गत आज प्रस्तुत है उनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर -

() पूरा नाम :
प्रमोद ताम्बट
() पिता/माता का नाम/जन्म स्थान:
श्री जे.एल. ताम्बट/श्रीमती मनोरमा ताम्बट/ पंचवटी, नासिक, महाराष्ट्र
() वर्तमान पता :
8A/15 नॉर्थ टी.टी. नगर भोपाल-462003
() मेल का पता :
tambatin@yahoo.co.in, tambatin@gmail.com
() टेलीफोन/मोबाईल .
0755-2776553, 09893479106
() आपके प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :
1.व्यंग्य एवं 2. व्यंग्यलोक
() अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :
नुक्कड़ ब्लॉग पर कभी कभी पोस्ट, छपास, अभिव्यक्ति, व्यू 24 अवर्स ब्लॉग पत्रिकाओं पर व्यंग्यों का प्रकाशन।
() अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है ?
वीरेन्द्र जैन का चिकोटी, संजय ग्रोवर का संवादघर, नीरज बधवार का व्यंजना, अनूप शुक्ला का फुरसतिया, अतुल चतुर्वेदी का चौपाल, कमलकांत बुधकर का यदाकदा, रवि रतलामी के रचनाकार छींटे और बौछारें, शैफाली पांडे के कुमाउनी चेली और मास्टरनी नामा, प्रमोद सिंह का अजदक, उदयप्रकाश का ब्लॉग, मनीषा पांडे का बेदखल की डायरी, सरिता अरगरे का नुक्ताचीनी, खुशदीप का देशनामा, परिकल्पना,समकालीन जनमत, समय के साए में, दृष्टिकोण, नास्तिकों का ब्लॉग, मोहल्ला लाइव के अलावा और भी कई ब्लॉग।
() ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
व्यंग्य, कविताएँ, समसामयिक विषयों पर प्रगतिशील विचारों के आलेख।
() आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?
16 मई 2009
() यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?
इस फील्ड में इतने कम समय में यह उपलब्धि निश्चित ही उत्साहजनक है मगर ब्लॉगिंग के प्रति और ब्लॉगिंग के ज़रिए एक प्रगतिशील वैचारिक माहौल बनाने के लिए और ज़्यादा प्रतिबद्ध होना होगा, जिम्मेदारियाँ बढ़ती सी लग रहीं हैं।
(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं
होता ?

बिल्कुल नहीं,
(११) यदि होता है तो उसे कैसे प्रबंध करते है ?
सारे आवश्यक कार्य समयबद्ध हैं इसलिए प्रबंधन के लिए कोई विशेष प्रयास नहीं करने होते।
(11) ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?
एक विस्तृत फलक पर स्वयं को पाना अपने आप में बहुत प्रसन्नता देने वाला होता है।
(१२) आपकी नजरों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?
सभी विधाओं को समाहित कर एक प्लेटफार्म पर ले आना इसकी विशेषता रही, और एक अनोखा फार्मेट तो था ही, जो शायद ब्लॉगिंग के इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा।
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?
नामी-दामी साहित्यकारों रचनाकारों का इसमें रुचि ना लेना सबसे ज़्यादा अखरने वाली बात थी गोया कि उनमें से कई ब्लॉगजगत में मौजूद हैं, और दूसरी कमी थी बेहद कम पाठक मिलना। ब्लॉगरों की यह सबसे खराब आदत है कि वे दूसरों को पढ़ना नहीं चाहते।
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?
यह कहना बहुत ही मुश्किल है
(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?
कोई टिप्पणी नहीं।
(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
बिल्कुल, बिना नागा..........
परिकल्पना को अपना एक एग्रीगेटर भी बनाना चाहिए ताकि पाठकों को सुविधा हो।
(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेबाजी बढ़ रही है ?
हाँ, खेमेबाजी काफी बढ़ती जा रही है।
(१८) क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?
खेमेबाजी में बंद हो जाना कभी मंगलकारी नहीं हो सकता। वैचारिक मुद्दों पर मतभेद खुले विचार वालों के लिए अपने आप को परिमार्जित करने का अवसर होते हैं, इसके लिए ब्लॉगिंग से अच्छा दूसरा कोई प्लेटफार्म नहीं।
(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :
-माता नासिक से, पिता कोल्हापुर से, मूलतः महाराष्ट्रीयन परिवार से, तीन भाइयों में सबसे बड़ा, फाइनआर्ट्स की स्नातकोत्तर एक अदद पत्नी का पति और एक भावी इन्जीनियर बालक का पिता। शासकीय सेवा में कार्यरत्।
-लालन-पालन, शिक्षा-दीक्षा, आवारागर्दी और कर्म क्षेत्र भोपाल रहा। कविता, पेन्टिंग, काष्ठकला, मूर्तिकला, पत्रकारिता में असफल हाथ आजमाया, रंगकर्म-नुक्कड़ नाटक में लम्बा अनुभव, भोपाल गैस त्रासदी आन्दोलन में सक्रिय भागीदारी। सन् 1982 से व्यंग्य लेखन। देश-विदेश के कई पत्र-पत्रिकाओं में व्यंग्यों का प्रकाशन। दो नुक्कड़ नाटकों ‘‘दास्तान--गैसकांड’’ और ‘‘खामोशी तोड़ दो’’ का स्थानीय स्तर पर प्रकाशित। फिल्म टी.वी सीरियल का अनुभव।
-ब्लॉगिंग प्रारम्भ करने के बाद व्यंग्य लेखन में एक निरन्तरता और तेज़ी आई, साथ-साथ भारत भर और विदेशों में एक पाठक वर्ग तैयार हुआ। दर्जनों पत्र-पत्रिकाओं ने भी नोटिस किया।
(२०) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहते हैं ?
कोई विशेष संस्मरण तो नहीं परन्तु एक बार जब अविनाश वाचस्पति ने मेरा टेलीफोन नम्बर लेकर मुझसे कम से कम आधा घंटा बात की तब मुझे ब्लॉगिंग की गंभीरता का और ज़्यादा गहराई से अहसास हुआ। अविनाश वाचस्पति जिस तरह देश भर में घूम घूमकर ब्लॉगरों से मिलते हैं और अपने ब्लॉगों के ज़रिए ब्लॉग जगत को समन्वित करते रहते हैं वह अनुपम है। रवि रतलामी, समीर लाल ऐसे लोग हैं जिनके सामने आधी रात को कोई समस्या रख दो वे त्वरित उसका हल प्रस्तुत कर देते हैं। कहना चाहूँगा ब्लॉगिंग में बहुत सारे अच्छे अच्छे लोग हैं।
(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ :
जो है उससे बेहतर चाहिए,
सारी दुनिया की सफाई के लिए एक मेहतर चाहिए!
-गजानन माधव मुक्तिबोध


बहुत बहुत धन्यवाद प्रमोद जी आपने अपना बहुमूल्य समय दिया ब्लोगोत्सव को .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।
आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद ....आपने यह सुयोग प्रदान किया !

() प्रस्तुति : रवीन्द्र प्रभात

16 comments:

sanjeev ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 2:55 pm

Chha Gaye Mamu

mala ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 3:46 pm

प्रमोद जी को हार्दिक बधाई।

गीतकार /geetkaar ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 3:49 pm

प्रमोद जी को बहुत बधाई

Udan Tashtari ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 5:04 pm

बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.

girish pankaj ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 5:56 pm

badhai pramod ji... aapka lekhan rang la kar rahaa.

राजीव तनेजा ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 7:50 pm

बहुत-बहुत बधाई

anita saxena ने कहा… 27 जुलाई 2010 को 8:42 pm

प्रमोद जी बहुत-बहुत बधाई । बहुत कम समय में आपने यह मुकाम हासिल किया है ईश्वर आपको और बडी सफलता दिलाए ....शुभकामनाएं

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 28 जुलाई 2010 को 12:40 pm

प्रमोद जी को बहुत बहुत बधाई.....आपके व्यंग बहुत सार्थक होते हैं

खुशदीप सहगल ने कहा… 28 जुलाई 2010 को 1:09 pm

साहित्य की विभूति प्रमोद जी को सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई...

प्रमोद जी जैसे मनीषी मेरे ब्लॉग देशनामा को पसंद करते हैं, पढ़कर धन्य हुआ...प्रमोद जी का दिल से शुक्रिया...

रवींद्र जी और ब्लॉगोत्सव २०१० टीम का आभार...

जय हिंद...

Rajendra Swarnkar ने कहा… 29 जुलाई 2010 को 2:39 am

आदरणीय भाई प्रमोद तांबट जी
बहुत बहुत बधाई स्वीकार करें ।
शुभकामनाओं सहित …

- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

प्रमोद ताम्बट ने कहा… 29 जुलाई 2010 को 1:36 pm

@ Khushdeep Sehgal
साहित्य की विभूति ????????
प्रमोद जी जैसे मनीषी ????????
खुशदीप जी इन भारी भारी शब्दों के लायक यह खाकसार है नहीं....... फिर भी आपकी सहृदयता और शुभकामनाओं के लिए अनेक धन्यवाद।
अन्य सभी को भी बहुत बहुत धन्यवाद।

प्रमोद ताम्बट
भोपाल

Sadhana Vaid ने कहा… 29 जुलाई 2010 को 7:34 pm

हार्दिक बधाइयां !

सुरेश यादव ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:33 pm

प्रमोद ताम्बट जी को हार्दिक बधाई.

 
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