दिल्ली निवासी पवन चन्दन विगत कई वर्षों से हिंदी चिट्ठाकारी में देशभक्ति की खुशबू बिखेरते आ रहे हैं ! ब्लोगोत्सव-२०१० पर प्रकाशित इनकी कविता : कारगिल के शहीदों के प्रति को पाठकों की काफी सराहना प्राप्त हुयी है . कहा जाता है कि समाज-देश के बाद जो स्वयं को महत्व दे वही सच्चा देश भक्त होता है ! ब्लोगोत्सव की टीम ने उनकी इस कविता को वर्ष की श्रेष्ठ देश भक्ति कविता का खिताब देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ! " जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत आज प्रस्तुत है श्री पवन चन्दन का व्यक्तिगत विवरण और हिंदी चिट्ठाकारी से संदर्भित दृष्टिकोण-

(१) पूरा नाम :

पी के शर्मा, पवन चंदन

(२) पिता/माता का नाम/जन्म स्थान :

स्‍व श्री बी एस शर्मा/ स्‍व श्रीमती शांती देवी

ग्राम व पोस्‍ट मीतली जिला मेरठ वर्तमान में जिला बागपत

उत्‍तर प्रदेश

(३) वर्तमान पता :

1/12 रेलवे कालोनी सेवा नगर नई दिल्‍ली 110003

ई मेल का पता :

pawanchandan@gmail.com

टेलीफोन/मोबाईल न.

01124622733] 9990005904

(४) आपके प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :

एक मात्र चौखट ( http://chokhat.blogspot.com/)

(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :

चौखट के अलावा, नुक्‍कड और जो भी ब्‍लॉग पसंद आता है उस पर टिपियाना

(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है

वे सभी ब्‍लॉग अच्‍छे लगते हैं जो समाज को कुछ देते हैं, तथा समाज की विसंगतियों को उजागर करते हैं।

(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?

हास्‍य व्‍यंग्‍य मुझे ज्‍यादा आकर्षित करता है। सुंदर स्‍वस्‍थ हास्‍य व्‍यंग्‍य मुझे बेहद पसंद है।

(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?

लेखन तो काफी समय से चल रहा है। कादम्बिनी के ब्लाग संबंधी आलेख से प्रेरणा पाकर और मित्र अविनाश वाचस्पति के सहयोग से 16 अक्‍तूबर 2007 से आरंभ।

(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?

खिताब मिलना अपने आप में एक बड़ी बात है, ऐसे अवसर प्रेरणा और प्रोत्‍साहन से मन को पुलकित कर देते हैं।

(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?

मैं ऐसा होने नहीं देता। कैसे भी, समय निकाल लेता हूं। वैसे तो ब्‍लॉगिंग को जितना समय दो उतना ही कम लगता है।

यदि होता है तो उसे कैसे प्रबंध करते है ?

येन केन प्रकारेण

(११)ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?

सुखद लग रहा है। ऐसे उत्‍सव होते रहने चाहिए।

(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?

जो अच्‍छे साहित्‍यकार नामचीन नहीं है, उन्‍हें एक नयी पहचान मिलेगी।

(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?

मुझे तो कोई खटकन नहीं हुई। हां इतना जरूर है कि कमियां सुधार का सहारा बनती हैं।

(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?

लगभग सभी ने। किसी को भी क्रम में सजाना, न्‍यायसंगत नहीं लगा।

(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?

कोई भी रचना अपने आप में कुछ लिए होती है। फिर नापसंद का तो सवाल ही नहीं उठता।

(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?

किया जायेगा तो मैं उसका स्‍वागत करूंगा।

(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?

दुखद लगता है।

(१८) तो क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?

हां.... अमंगलकारी तो है ही। चिठ्ठाकार भी एक जगह आम आदमी की तरह होता है और आदमी ने अभी द्वेष और ईर्ष्‍या छोड़ी ही कहां है...

(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :

मैं हास्‍य पसंद हूं। मेरा एक छोटा सा परिवार है। एक मात्र पत्‍नी जी हैं। एक बेटा, एक बिटिया है। भारतीय रेल सेवा से आजीविका चल रही है। वैसे बहुत कुछ न कह कर एक दोहा कहूं तो...

सदा अधूरे ही रहे, सच-सच कहूं जनाब

धनवानों के चोंचले और धनहीनों के ख्‍वाब

(२०) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहते हैं ?

एक कविता जो मैंने सन 1981 में लिखी थी उसे ब्‍लॉग पर फोटो... ऐसे भी होते हैं 9 जून को पोस्‍ट किया था। इस कविता को पढ़कर कलकत्‍ता से एक व्‍यक्ति ने फोन करके मुझे बधाई दी । ये घटना मेरे को अभिभूत करने के लिए काफी थी। वैसे मैं इस कविता को भी ब्‍लोगोत्‍सव में भेजना चाहता था। http://chokhat.blogspot.com/

(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ : (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो/विडिओ का प्रयोग भी कर सकते हैं )

वैसे तो मेरी अपनी सभी कवितायें पसंद है, किन्तु यह कविता कुछ ज्यादा ही जो ललित डोट कोम पर प्रकाशित है, लिंक दे रहा हूँ आप भी पढ़िए -http://lalitdotcom.blogspot.com/2010/06/6.html

बहुत बहुत धन्यवाद आपका पवन जी .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।


जी आपका भी बहुत-बहुत धन्यवाद !
प्रस्तुति: रवीन्द्र प्रभात

8 comments:

वन्दना ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 12:56 pm

pawan jii ko hardik badhaayi aur shubhkamnayein.

गीतेश ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:01 pm

पवन चन्दन जी को बहुत-बहुत बधाईयाँ !

mala ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:04 pm

बहुत-बहुत बधाईयाँ !

पूर्णिमा ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:08 pm

पवन जी को हार्दिक बधाई।

राजीव तनेजा ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 7:47 pm

पवन जी को बहुत-बहुत...बहुतायत में बधाई

खुशदीप सहगल ने कहा… 3 अगस्त 2010 को 2:01 pm

चंदन जी के विराट और ओजस्वी व्यक्तित्व से रू-ब-रू होने का अवसर मुझे अविनाश वाचस्पति भाई के सौजन्य से कई बार मिल चुका है...कविता रत्न चंदन जी को सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई...

रवींद्र भाई और ब्लॉगोत्सव २०१० टीम का आभार...

जय हिंद...

 
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