ब्लोगोत्सव-२०१० के अंतर्गत श्रेष्ठ पोस्ट श्रृंखला प्रकाशित की गयी थी, इस श्रंखला में भिन्न-भिन्न ब्लॉग से कतिपय श्रेष्ठ पोस्ट का चयन किया गया था, जिसमें से तीन श्रेष्ठ पोस्ट को वर्ष के श्रेष्ठ पोस्ट की संज्ञा ब्लोगोत्सव की टीम द्वारा प्रदान करते हुए तीनों पोस्ट लेखक को अलग से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है !
आज हम उन्हीं तीनों पोस्ट में से एक व्यग्य पोस्ट की चर्चा करने जा रहे हैं -
वर्ष के श्रेष्ठ व्यंग्य पोस्ट का खिताब :
झोला छाप डॉक्टर
व्यंग्यकार : राजीव तनेजा
चिट्ठा :
हंसते रहो
मूल ब्लॉग पर प्रकाशन की तिथि : 22 जून 2008
(वर्ष २००८ के जनवरी माह से वर्ष-२०१० के ३१ मार्च तक प्रकाशित विभिन्न ब्लॉग पोस्ट से एक पोस्ट का चयन करते हुए उन्हें सम्मानित करने की योजना थी, इसी के अंतर्गत उपरोक्त पोस्ट का चयन किया गया है )"जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत प्रस्तुत है उनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर -

(१) पूरा नाम : राजीव तनेजा

(२) पिता/माता का नाम/जन्म स्थान :
श्री राम लाल तनेजा/श्रीमती विद्या तनेजा /दिल्ली

(३) वर्तमान पता :
AE-173, शालीमार बाग.दिल्ली-110088

ई मेल का पता :rajivtaneja2004@gmail.com
टेलीफोन/मोबाईल न.+919810821361
(४) आपके प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :
हँसते रहो

(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :
ब्लॉग 4 वार्ता, नुक्कड़,स्मृति दीर्घा,

(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है :
देशनामा,अलबेला खत्री,

(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
हास्य-व्यंग्य

(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?-
जुलाई 2007 से

(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?
बहुत बढ़िया

(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?
कुछ खास नहीं

(११)ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?
बहुत बढ़िया

(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?
उन्नत किस्म की रचनाओं को पढ़ने का मौका मिला

(१३) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
हाँ!...ज़रूर
(१४) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?
कुछ-कुछ
(१५) तो क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?
हाँ भी और नहीं भी
(१६) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :
पेशे से मैं रेडीमेड दरवाजों का थोक विक्रेता हूँ...हास्य-व्यंग्य लिखने वा पढ़ने में रूचि है...फिल्में देखना पसंद है...उम्मीद है कि किसी दिन फिल्मों एवं धारावाहिकों के लिए लिखने का मौका मिलेगा :-)

बहुत बहुत धन्यवाद आपका राजीव जी .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।


प्रस्तुति: रवीन्द्र प्रभात

13 comments:

गीतेश ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:02 pm

राजीव जी को बहुत-बहुत बधाईयाँ !

mala ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:05 pm

बहुत-बहुत बधाईयाँ !

पूर्णिमा ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 4:07 pm

राजीव जी को हार्दिक बधाई।

वन्दना ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 5:56 pm

राजीव जी को बहुत-बहुत बधाईयाँ !

Udan Tashtari ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 7:43 pm

राजीव जी को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ.

ललित शर्मा ने कहा… 31 जुलाई 2010 को 8:25 pm

लख लख बधाईयाँ जी
क्रोड़ क्रोड़ बधाईयाँ जी

Mrs. Asha Joglekar ने कहा… 1 अगस्त 2010 को 5:04 am

राजीव जी को बधाई ।

M VERMA ने कहा… 1 अगस्त 2010 को 10:32 am

राजीव जी को बधाई

Rajendra Swarnkar ने कहा… 2 अगस्त 2010 को 10:03 pm

राजीव तनेजा जी

ब्लॉगोत्सव में सम्मानित - पुरस्कृत होने पर बधाई !

- राजेन्द्र स्वर्णकार
शस्वरं

Rajendra Swarnkar ने कहा… 2 अगस्त 2010 को 10:04 pm
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
खुशदीप सहगल ने कहा… 3 अगस्त 2010 को 1:57 pm

एक व्यस्त इनसान किस तरह घर और व्यवसाय की ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए ब्लॉगिंग के प्रति समर्पित रह सकता है, उसकी शाश्वत मिसाल हैं राजीव तनेजा...मुझे तो विशेष तौर पर ब्लॉगिंग के पहले दिन से ही राजीव भाई का विशेष स्नेह मिला है...वैसे राजीव भाई का उल्लेख संजू भाभी के बिना नहीं किया जा सकता...किस तरह वो राजीव
भाई की रचनात्मकता को उभारने के लिए कंधे से कंधा मिलाकर साथ चलती हैं, इसका मैं सीधा गवाह रह चुका हूं...
राजीव भाई को इस सम्मान के लिए बहुत-बहुत बधाई...

रवींद्र भाई और ब्लॉगोत्सव २०१० टीम का आभार...

जय हिंद...

girish pankaj ने कहा… 5 अगस्त 2010 को 10:23 pm

pichhale dino vyast rahaa .iss chakkar me rajiv bhai ke samman ki soochana mai dekh hi nahee paya thaa. aaj ...abhi nazar padee. to socha, der aayad durust aayad kahaa hi jataa hai.abhi de doon badhai. bahut-bahut badhai. sahi vyakti ko mila hai samman..

 
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