"निश्चित रूप से अन्तराष्ट्रीय हिंदी ब्लॉग उत्सव मनाने की ये पहल प्रशंसनीय है . मैं इस पहल का स्वागत करता हूँ और इसके क्रियान्वयन में अपनी सकारात्मक सहभागिता का विश्वास दिलाता हूँ .साथ ही रवीन्द्र जी को एक सुझाव भी देना चाहता हूँ कि परिकल्पना के माध्यम से एक ऐसा कार्यक्रम अंतरजाल पर चलाया जाए जिसमें ज्यादा से ज्यादा बच्चों की सहभागिता सुनिश्चित हो तथा उन्हें कला और संगीत की सही तालीम देते हुए समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाया जा सके, क्योंकि कला के माध्यम से ही हम समाज को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकते हैं ..........!" उदगार है एक ऐसे व्यक्ति का जो देश के प्रमुख व्यवसायी और कवि, साधक. चिन्तक हैं ... नाम है सुमन कुमार सिन्हा , पटना स्थित रीजेंट सिनेमा हौल के मालिक और आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख सदस्य . ....ब्लोगोत्सव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के दृष्टिगत ब्लोगोत्सव की टीम ने उन्हें वर्ष के श्रेष्ठ ब्लॉग शुभचिंतक का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है ! "जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत आज प्रस्तुत है उनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर-


(१) पूरा नाम :

सुमन सिन्हा
(२) पिता-

स्व. सुशील कुमार सिन्हा

जन्म स्थान :

पटना

(३) वर्तमान पता :

' कृष्ण कुञ्ज अपार्टमेन्ट बेहिंद कार्लो मोटर्स के पीछे , बोरिंग रोड , पटना -८००००१
टेलीफोन/मोबाईल न0-

09334192689

(४) प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :-

http://zindagikhwaabhai.blogspot.com/


(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :

समय की बहुत कमी होने के कारण ब्लोगिंग में अत्यधिक संलग्नता संभव नहीं
(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है ?

रश्मि प्रभा जी की मेरी भावनाएं
(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?

जीवन से जुड़ी बातें

(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?

- बस अभी बनाया है .. आपके ब्लोगोत्सव से प्रेरित होकर

(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?

सफलता हमेशा सुकून देती है ..
(१०) ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?

साहित्य से हमेशा लगाव रहा, एक साथ इतने लोगों को पढना बहुत अच्छा लगा ..
(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?

हर क्षेत्र तक पहुँचने की हर संभव कोशिश ..
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?

इस पर मैंने ध्यान नहीं दिया
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?

रश्मि प्रभा

(१५) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?

अवश्य होना चाहिए...
(१६) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :

मैंने बचपन से चुनौतियों को स्वीकार किया , 'असंभव' शब्द से मैं दूर रहा, गलत को गलत कहने की हिम्मत रही, सही का साथ दिया .......
(1७) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ : (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो का प्रयोग भी कर सकती हैं )

कब देखा था उसे याद नहीं

पर जब - जब देखा
वह उड़ते बादलों सी लगी
जब तक ऊपर दृष्टि जाती
तब तक वो नीचे लहरा जाती
शोख गुनगुनाती हवाओं के संग
बांधती थी अपने आँचल का छोर
और मुझे एक गीत लिखने को बाध्य कर जाती


पर लिख ना सका कोई गीत
कुछ शब्द ही उकेरे थे
कि जाने वह कहाँ खो गई
दी थी आवाज़ उन जगहों पर
जहाँ झुकी आँखों से उसने अधिकार दिया था
लगता रहा
हो गया सब ख़त्म !
मेरी पुकार प्रतिध्वनि बन मेरे ही पास लौट आई
...........
पर नहीं , जो भी पुकार लौटी
वह बाद्लोंवाली उस लड़की की थी
हर बार उसकी सिसकियाँ कहती रहीं
'आऊँगी एक दिन'


पर -
मेरे अन्दर की जिजीविषा मिटने लगी
रिश्तों से बू आने लगी
अपनी पहचान भी गुम होने लगी
तभी एक आवाज़ चिर पहचानी सी आई ...


झटके में सारी स्मृतियों ने सर उठाया
उम्र के झरोखे से वही चेहरा नज़र आया
खोने और खो जाने की कशमकश से अलग
वह वही बादल लगी और ...
इस बार मैंने आकाश बनने में देर नहीं की
धरती से आकाश तक
अपने प्यार की प्रत्यंचा पर
उसकी उड़ान को गति दी
.....
उसकी आँखों से बहते स्नेह निर्झर में
मैंने तैरना सीख लिया है
जो गीत अधूरे रह गए थे
उन्हें लिखता जा रहा हूँ


तुम नहीं समझोगे
नहीं मानोगे
कोई लड़की बादल हो सकती है
धरती पर उतर कर भी
वह आकाश को ही छूती है !
मुश्किल है तुम्हें समझाना
तुम्हें बताना
कि कुछ रिश्ते दैविक होते हैं
भोर की पहली किरण
गठबंधन करती है
कोयल की कूक मंगलाचार गाती है
संध्या की लाली मांग का सिंदूर बन जाती है
रात गए चांदनी उसका चेहरा देखने आती है
तुम नहीं मानोगे
पर जानोगे एक दिन
ऐसे रिश्ते ईश्वर का वरदान होते हैं
हर नाम से अलग एक ख़ास पहचान होते हैं
.....!!!


बहुत बहुत धन्यवाद सुमन जी आपने ब्लोगोत्सव के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित कर श्रेष्ठ शुभचिंतक होने का प्रमाण दिया है .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।


प्रस्तुति: रवीन्द्र प्रभात

12 comments:

mala ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 3:55 pm

सुमन सिन्हा जी को बहुत-बहुत बधाईयाँ !

गीतेश ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 3:56 pm

बहुत-बहुत बधाईयाँ !

संगीता पुरी ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 4:25 pm

बहुत बहुत बधाई !!

पूर्णिमा ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 4:59 pm

हार्दिक बधाई।

Udan Tashtari ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 6:10 pm

बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएँ

honesty project democracy ने कहा… 13 अगस्त 2010 को 7:45 pm

सुमन जी को ब्लॉग लिखने के लिए और ब्लोगिंग के विकाश के लिए सोचने के लिए बहुत-बहुत बधाई ...

निर्मला कपिला ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 6:47 pm

suman sinhaa jee ko bahut bahut badhaaI aur shubhakaamanaayen

प्रमोद ताम्बट ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 9:35 pm

सुमन सिन्हा जी को बहुत-बहुत बधाईयाँ !

ρяєєтι ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 12:28 am

Suman Uncle Ji Bahut bahut Badhai aapko..; Kuch Meetha ho jaaye [:)]

वाणी गीत ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 5:12 am

सुमन जी को बहुत बधाई ...!

 
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