मुकेश चन्द्र ब्लोगोत्सव की सहयोगी पत्रिका लोकसंघर्ष के दिल्ली स्थित कार्यालय में ब्यूरो चीफ हैं और कैम्पस संधान (पाक्षिक) के सहायक संपादक ! इन्होने ब्लोगोत्सव-२०१० में हिंदी के तीन महत्वपूर्ण हस्ताक्षरों क्रमश: श्री प्रेम जनमेजय, श्री दिविक रमेश और श्री अविनाश वाचस्पति के साक्षात्कार लिए ! इन्होने मीडिया में ब्लोगोत्सव को एक व्यापक प्रभामंडल देने का कार्य किया ! आजकल ये ब्लोगोत्सव-२०१० के अनोखे प्रयोग और प्रस्तुति पर एक शोधपरक आलेख लिखने में व्यस्त हैं जो संभवत: सितंबर-अक्तूबर-२०१० में किसी महत्वपूर्ण समाचार-पत्र में प्रकाशित होने की संभावना है !ब्लोगोत्सव के प्रति इनके अनुराग और पत्रकारिता के प्रति गहन समर्पण को देखते हुए ब्लोगोत्सव की टीम ने इन्हें वर्ष के श्रेष्ठ युवा पत्रकार के रूप में अलंकृत करते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है !"जानिये अपने सितारों को" के अंतर्गत प्रस्तुत है उनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर-

१) पूरा नाम :

मुकेश चन्द्र
(२) पिता/माता का नाम/जन्म स्थान :

डा० उमेश चन्द्र /श्रीमती शकुन्तला देवी / बाराबंकी
(३) वर्तमान पता :

द्वारा रमेश कुमार, भवन संख्या-२५ एच, सागरपुर (पश्चिम)

नयी दिल्ली-४६
ई मेल का पता :

mukeshchandra_rps@yahoo.com
टेलीफोन/मोबाईल न०

९७१८५६५४३५६/९४५३८५४६६६
(४) आपके प्रमुख व्यक्तिगत ब्लॉग :

मेरा फिलहाल कोई व्यक्तिगत ब्लॉग नहीं है , जो कुछ भी लिखता हूँ लोकसंघर्ष उसे प्रकाशित कर देता है यानी वही मेरा व्यक्तिगत ब्लॉग है
(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :

फिलहाल लोकसंघर्ष के अतिरिक्त और कहीं नहीं, अब परिकल्पना से जुड़ गया हूँ तो इसपर भी आप हमें देख सकेंगे विशेष प्रयोजनों पर
(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है :

परिकल्पना, नुकड़ ,लोकसंघर्ष,शब्द-शब्द-अनमोल,ब्लोगोत्सव-२०१० आदि
(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?

सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनैतिक विषय
(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?

कहां, न लोकसंघर्ष को ही मैं अपना व्यक्तिगत ब्लॉग मानता हूँ किन्तु आपने मुझे भी ब्लोगिंग का चस्का लगा दिया है , शीघ्र ही आप मेरा भी ब्लॉग देखेंगे हिंदी में ...!
(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?

जैसे सारा आसमान मुट्ठी में आ गया है , ऐसा महसूस हो रहा है !
(१०) क्या पत्रकारिता से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?

पत्रकारिता ही तो मेरा जीवन है, भला अवरोध कैसे उत्पन्न होगा
(११) ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा ?

इसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता , बस यह समझ लीजिये कि बहुत ख़ुशी हुई !
(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही ?

इसकी विशेषताओं के बारे में अभी कुछ भी कहना बेमानी होगा , क्योंकि जब ब्लोगोत्सव भूत होगा और इसकी विशेषताओं को भविष्य वर्त्तमान में रूपांतरित करेगा तब इसके आयाम परिलक्षित होंगे ! आपने इस ब्लोगोत्सव की अनोखी परिकल्पना कर अपना नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज करा दिया है !आप हिंदी चिट्ठाकारी के वह भीष्म हैं जिन्हें कुछ भी पाने की चाह नहीं , जो देने में विश्वास रखता है ! आपको मेरा नमन .....
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही ?

मैं तो पत्रकार हूँ , मुझे सच कहने से कौन रोक सकता ....कमी की बात छोडिये शायद ही दूसरा ब्लोगोत्सव इतना सुन्दर और सारगर्भित हो पाए !
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?

सबने, आपका चुनाव लाजबाब रहा !
(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?

ऐसा कोई भी नहीं था जिसकी रचनाएँ पसंद न आई हो
(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?

विल्कुल होना चाहिए
(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?

एक पत्रकार की आँखों से देखूं तो खेमेवाजी स्पष्ट दिखाई दे रही है, किन्तु आपने खेमेवाजी को ऐसे ध्वस्त कर दिया ब्लोगोत्सव के दौरान कि एक हलकी सी आवाज़ भी नहीं हुई आउट टूट गया मिथक दरक गयी कुछ महत्वपूर्ण मठाधीशों के मठ । आप सचमुच हिंदी चिट्ठाकारी के राम चन्द्र शुक्ल हैं !
(१८) क्या यह खेमेवाजी हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?

जिसके अन्दर प्रतिभा है वह तो दरिया है , उसे अपना हुनर मालूम है, वह जिस तरफ से जाएगा ...अपना रास्ता बना लेगा ! जैसे आपने बनाया ब्लोगोत्सव का रास्ता और सुमन जी,अविनाश जी, जाकिर जी,रश्मि प्रभा जी,ललित शर्मा जी जैसे सुलझे हुए लोग आपके श्रेष्ठ सहयोगी बने !
(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं :

मैंने राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय फैजाबाद से दो विषयों से एम एस सी किया ,फिर लखनऊ विश्वविद्यालय से मास्टर ऑफ पब्लिक प्रशासन (एम पी ए ) तथा पी जी डी सी ए किया और दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पी जी डिप्लोमा .....और भी बहुत कुछ !

लेकिन जो बातें मैं यहाँ करने जा रहा हूँ वह सुनकर चौंक जायेंगे आप !

बात यह है कि मैं ब्लोगोत्सव पर एक शोधपरक आलेख तैयार कर रहा हूँ , ताकि ब्लोगोत्सव के सितारे इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाए ...और भी कुछ करना चाहता हूँ ब्लोगोत्सव के लिए मगर उसे फिलहाल बयान नहीं कर सकता !
(२०) पत्रकारिता से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहते हैं ?

ऐसा कोई संस्मरण नहीं है !
(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ : (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो/विडिओ का प्रयोग भी कर सकते हैं )

फिर कभी

बहुत बहुत धन्यवाद .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।


जी धन्यवाद!
प्रस्तुति : रवीन्द्र प्रभात

7 comments:

mala ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 4:25 pm

मुकेश चन्द्र जी को ढेर सारी बधाईयाँ और शुभकामनाएं !

पूर्णिमा ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 4:28 pm

बधाईयाँ और शुभकामनाएं !

गीतेश ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 4:29 pm

बहुत-बहुत बधाईयाँ मुकेश जी

shikha varshney ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 5:22 pm

बहुत बहुत बधाई मुकेश जी को.

Udan Tashtari ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 5:26 pm

बहुत बहुत बधाई एवं शुभकामनाएँ.

संगीता पुरी ने कहा… 9 अगस्त 2010 को 5:30 pm

मुकेश जी को ढेर सारी बधाई और शुभकामनाएं !!

निर्मला कपिला ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 11:04 am

मुकेश जी से परिचय अच्छा लगा। स्वतंत्रता दिवस कि ढेर सारी शुभकामनाएँ

 
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