श्री समीर लाल 'समीर' हिंदी चिट्ठाजगत के सर्वाधिक समर्पित,लोकप्रिय और सक्रिय हस्ताक्षर हैं . लोकप्रियता के मामले में इन्हें हिंदी चिट्ठाजगत में वही सम्मान प्राप्त है जो भारतीय संगीत में ऐ. आर. रहमान को .साहित्य की हर विधाओं में लिखने वाले श्री समीर लाल जी का व्यंग्य जहां दिल की गहराईयों में जाकर गुदगुदाता है वहीं इनकी कविता अपनी संवेदनात्मक अभिव्यक्ति के कारण चिंतन के लिए विवश कर देती है .नए चिट्ठाकारों के लिए प्रेरणास्त्रोत श्री समीर लाल जी की लोकप्रियता का पैमाना यह है कि हर नया चिट्ठाकार इन्हें अपनी प्रेरणा का प्रकाश पुंज महसूस करता है.मैंने ब्लोगोत्सव-२०१० के दौरान इनसे पूछा था इनके ब्लॉग उड़न तश्तरी के पोपुलर होने का राज -......आज यह उद्घोषित करते हुए मुझे अपार ख़ुशी हो रही है कि ब्लोगोत्सव-२०१० की टीम ने इन्हें वर्ष के श्रेष्ठ चिट्ठाकार का अलंकरण देते हुए सम्मानित करने का निर्णय लिया है . "जानिये अपने सितारों को " के अंतर्गत आज प्रस्तुत है इनसे पूछे गए कुछ व्यक्तिगत प्रश्नों के उत्तर-

(१) पूरा नाम :
समीर लाल
(२) पिता/माता का नाम/जन्म स्थान :
पिता: श्री पी.के.लाल, सेवानिवृत एक्ज्यूकिटिव डायरेक्टर, म.प्र.विद्युत मंडल एवं माता: स्व. श्रीमति सुषमा लाल, जन्म स्थान: रतलाम, म.प्र.
(३) वर्तमान पता :
३६ ग्रीन हाफ ड्राईव, एजेक्स, ओन्टारियो, कनाडा
ई मेल का पता :
sameer.lal@gmail.com
टेलीफोन/मोबाईल नं:
९०५-४२-२०८५ मोबाईल: ४१६-३८८-८५०३
(४) वैसे एक सर्वाधिक चर्चित ब्लोगर से मुझे यह प्रश्न नहीं पूछना चाहिए था , किन्तु इसलिए पूछ रहा हूँ ताकि नए ब्लोगर को आपके बारे में जानने में सुविधा होगी , तो चलिए अब बता ही दीजिये अपने व्यक्तिगत ब्लॉग का नाम :
नहीं-नहीं ऐसी बात नहीं है, जिस ब्लॉग से मेरी पहचान जुडी है उस ब्लॉग के बारे में जितनी बार पूछेंगे बताऊंगा ....मेरे ब्लॉग का नाम है- उड़न तश्तरी यानी http://udantashtari.blogspot.com/
(५) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त अन्य ब्लॉग पर गतिविधियों का विवरण :
चिट्ठाचर्चा पर पूर्व में चर्चा, ताऊ रामपुरिया एवं लाल ऎन्ड बवाल के ब्लॉग पर सक्रिय योगदान, बच्चों के ब्लॉग पर कवितायें, मंथन ब्लॉग पर लघुकथाएँ, महावीर ब्लॉग पर कविताएँ, हिन्दी चेतना पत्रिका में नियमित व्यंग्यकार, गर्भनाल, अनुभूति, साहित्यकुँज पर प्रकाशित
(६) अपने ब्लॉग के अतिरिक्त आपको कौन कौन सा ब्लॉग पसंद है :
एक दो हों तो नाम लेना उचित होगा. जो भी अच्छा लिखता है, उसे पढ़ता हूँ. वो ही पसंद आ जाते हैं.
(७) ब्लॉग पर कौन सा विषय आपको ज्यादा आकर्षित करता है?
वैसे मुझे व्यंग्य ज्यादा आकर्षित करते हैं किन्तु मार्मिक संस्मरण जबरदस्त छाप छोड़ते हैं.
(८) आपने ब्लॉग कब लिखना शुरू किया ?
ब्लॉग लेखन मार्च २००६ से शुरु किया.
(९) यह खिताब पाकर आपको कैसा महसूस हो रहा है ?
निश्चित ही गौरवांवित महसूस कर रहा हूँ. आज जब हिन्दी ब्लॉगर्स की संख्या बढ़कर २४००० से ज्यादा हो गई है, तब इस तरह का खिताब पाना गर्व का अहसास देता है.
(१०) क्या ब्लोगिंग से आपके अन्य आवश्यक कार्यों में अवरोध उत्पन्न नहीं होता ?
ऐसा अब तक तो महसूस नहीं किया. समय और प्राथमिकताओं का प्रबंधन करना होता है.
यदि होता है तो उसे कैसे प्रबंध करते है?
इसी के प्रबंधन की वजह से मैने अपनी नींद में कटौती कर पिछले कई वर्षों से ४ से ४.३० घंटे में नींद पूरी कर लेने का अभ्यास कर लिया है. साथ ही मेरे लिए २० मिनट का महर्षि महेश योगी का ध्यान भी तरोताजा रख सभी कार्यों को यथासंभव समय देने में कारगर सिद्ध होता है.
(११)ब्लोगोत्सव जैसे सार्वजनिक उत्सव में शामिल होकर आपको कैसा लगा?
ब्लॉगोत्सव जैसे विशाल और अभिनव आयोजन का हिस्सा बन बहुत अच्छा लगा.
(१२) आपकी नज़रों में ब्लोगोत्सव की क्या विशेषताएं रही?
इसके माध्यम से अनेकों उत्कृष्ट रचनाएँ पढ़ने और सुनने मिली. लगातार एक आकर्षण बना रहा. जिस तरह से इसका प्रबंधन एवं आयोजन किया गया, वो निश्चित ही आगे आने वाले समय में अनुकरणीय रहेगा.
(१३) ब्लोगोत्सव में वह कौन सी कमी थी जो आपको हमेशा खटकती रही?
ब्लॉगोत्सव का इतना लम्बे समय तक चलते रहना जहाँ एक वर्ग को रुचिकर लगा, वहीं कभी कभी रचनाओं की अधिकता और इसके लम्बे समय तक चलने नें बीच बीच में मन को भटकाया. मुझे लगता है कि इसे और सघन, संक्षिप्त एवं कम रचनाओं के साथ लाना लोगों को ज्यादा बाँधता. देखा गया कि बाद में टिप्पणियों की संख्या में भी कमी आई. जो उत्साह शुरु में पाठकों में दिखा, वो उर्जा बीच में कहीं खो सी गई दिखी. ऐसा मेरा मानना है शायद मैं गलत भी हूँ.
(१४) ब्लोगोत्सव में शामिल किन रचनाकारों ने आपको ज्यादा आकर्षित किया ?
ब्लोगोत्सव में यूँ ही चुनिंदा रचनाओं और रचनाकारों को लिया गया था तो जाहिर सी बात है सभी अपनी उत्कृष्ट रचनायें प्रस्तुत कर रहे थे. उसमें से यह कहना कि किसने ज्यादा आकर्षित किया, बहुत कठिन है. मैं तो मंत्रमुग्ध सभी से आकर्षित रहा.
(१५) किन रचनाकारों की रचनाएँ आपको पसंद नहीं आई ?
हा हा!! ऐसा कब हुआ है मेरे साथ वो भी तब, जब ऐसी चयनित रचनायें प्रस्तुत की गई हों.
(१६) क्या इस प्रकार का आयोजन प्रतिवर्ष आयोजित किया जाना चाहिए ?
यह आयोजन हर वर्ष जरुर किया जाना चाहिये. नई प्रतिभाओं को आगे लाने और सभी को एक मंच से प्रस्तुत करने का यह अभिनव और अनूठा प्रयास है.
(१७) आपको क्या ऐसा महसूस होता है कि हिंदी ब्लोगिंग में खेमेवाजी बढ़ रही है ?
जाने यह शब्द किसने और कब इस्तेमाल करना शुरु कर दिया. मुझे अमिताभ, शाहरुख, शैफ की मूवी पसंद हैं, लेकिन अजय देवगन मुझे पसंद नहीं आता तो क्या मैं अजय देवगन के विरोधी खेमे का हो गया. सबके अपने प्रशंसक हैं. कुछ लेखनजनित, कुछ व्यवहार जनित, कुछ कम्पलीट पैकेज की तरह पसंद करते हैं तो बार बार पढ़ते हैं, इसमें खेमेबाजी कैसी. देखने में आ ही रहा है कि जो कल तक मेरे लेखन के प्रशंसक थे, आज मेरे किसी व्यवहार से नाप्रसन्न हो मेरे बाजये मेरे लेखन के विरोधी हो गये. मुझे पढ़ना बंद कर दिया. मैं फिर भी इसे खेमेबाजी की जगह पसंदगी और नापसंदगी का दर्जा देना ही पसंद करुँगा. ब्लॉगजगत में सभी पढ़े लिखे हैं, उन्हें खेमों में बांट बांधे रखना मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन है. यह वो जमात नहीं जो किसी लालच में ट्र्क में भर कर लाये जा सकें और इनसे कोई भी जिन्दाबाद मुर्दाबाद के नारे लगवा ले.
(१८) क्या यह हिंदी चिट्ठाकारी के लिए अमंगलकारी नहीं है ?
दोस्त का दोस्त दोस्त और दोस्त का दुश्मन, दुश्मन से बढ़कर जब बात दुश्मन का दुश्मन दोस्त पर आने लगे तो बात निश्चित अमंगलकारी होगी. अभी तो कभी कभार इस बात का दिखना मात्र लड़कपन मान कर अनदेखा किया जा सकता है.
(१९) आप कुछ अपने व्यक्तिगत जीवन के बारे में बताएं:
व्यक्तिगत जीवन के बारे में: वैसे तो पेशे से मैं भारत से चार्टड एकाउन्टेन्ट हूँ. परिवार में पत्नी साधना के अलावा पुत्र अनुपम और अनुभव, दोनों कम्प्यूटर ईंजिनियर हैं. अनुपम की दिसम्बर २००८ में प्रगति से अपने गृहनगर जबलपुर जाकर शादी की. अनुभव की सगाई दो रोज पहले ही की है प्रियंका से जो को दिल्ली की रहने वाली है किन्तु एम बी ए करने यहाँ आई थी और अब बैंक में नौकरी कर रही है. यहाँ आकर मैं भी टेक्नालॉजी की फील्ड में ही जुट गया. पढ़ने का जबरदस्त शौक है तो नियमित नये कोर्स करते रहना आदत बन गई है. अमेरीका से सी एम ए, पी एम पी, एम एस एक्सेल एक्सपर्ट, स्टॉक एक्सचेंज के तमाम कोर्स, रिस्क मेनेजमेन्ट आदि कोर्स कर डाले हैं. तकनिकी पर नियमित लेखन भी विभिन्न पत्रिकाओं के लिए जारी रहता है. कुछ जगह तकनिकी पर लेक्चर भी लेता हूँ. एक बैंक के लिए सलाहकार हूँ और एक कम्पनी के माध्यम से कुछ व्यापार भी करता हूँ.
भारत वापस पहुँच जाने का और वहाँ बसने का सपना है मगर लगता है कि ६-६ माह का बंटवारा करना पड़ेगा. यहाँ भी मकान ले लिया है और वहाँ भी. बस, अब बच्चे सेटल हो गये हैं तो इस दिशा में कार्य करना प्रारंभ कर दिया है. देखिये, कब तक कार्य रुप लेती है यह योजना. लेखन के आलावा पठन और भ्रमण का बहुत शौक है और व्यापार के सिलसिले में यह भ्रमण का सिलसिला यूँ भी जरुरत से ज्यादा है.


सन 1999 में बेटे दोनों 12वीं कर चुके थे. इच्छा थी कि वो कनाडा आकर विश्वविद्यालय की पढ़ाई करें. इसके पूर्व भी घूमने कनाडा कई बार आना हुआ था. बड़ा मजा आता है और उस समय तो उम्र से भी काबिल थे. बहुत से मित्र यहाँ थे. बस, मचल उठे चमक दमक देख और आड़ अच्छी और सभ्य थी कि बच्चों के कैरियर का सवाल है मगर ज्यादा कुछ तो अपने मन की दबी चाह ही रही होगी कि वहाँ भी किस्मत आजमाई जाए, रह कर देखा जाए, यहाँ ले आई. आने के बाद वैसा ही यथार्थ दर्शन हुआ जैसा प्रेम के बाद विवाह करके होता है. तब जिन्दगी की असल आपाधापी आपको धरातल दिखाती है. घूमने आते थे तो बात अलग थी, बस घूमना और मस्ती छानना. अब तो काम भी करना होता था. नौकरी बजाने से लेकर बरफ साफ करते दिन में ही वो चमकीले तारे दिखने लग गए जो घसीट कर हमें यहाँ लाए थे. वापस लौटने की राह न थी. क्या मूँह दिखाते तो बस, नौकरी में लगे रहे और वाकई जो आड़ थी वो उद्देश्य बन गया. बच्चे पढ़ लिख कर कायदे की नौकरी और व्यापार में लगे. अब हम जुगाड़ में लगे हैं कि कैसे भारत लौट जाएं पूरे से, मगर सुविधाओं की जंजीरें बड़ी मोटी और मजबूत होती हैं, काटते काटते ही कटेंगी. हम तो झटका मार कर जंजीर तोड़ कर भाग भी निकले, लेकिन पत्नी के तो पैर भी नाजुक हैं, कहीं बेचारी मोच न खा जाए इसलिए धीरे धीरे जंजीर के कटकर अलग होने का दिवा स्वपन पाले जिए जा रहे हैं. हर बार भारत जाते हैं, हालात, दुर्दशा, बिजली पानी की जूझन, ट्रेफिक का बुरा हाल, रोज रोज की जहमतें झेल कर जब वापस आते हैं तो इन जंजीरों को और मजबूत होता देखते हैं. कभी तो हालात बेहतर होंगे और यह जंजीरें कमजोर. देखिए, कब सपना साकार होता है.


(२०) चिट्ठाकारी से संवंधित क्या कोई ऐसा संस्मरण है जिसे आप इस अवसर पर सार्वजनिक करना चाहते हैं ?
चलिए, आज आपको बतलाता हूँ कि सन २००५ में भारत और घर की याद के चलते मैं लगभग डिप्रेशन का शिकार हो गया था. न किसी काम में मन लगता और न ही जीवन में कोई उत्साह रह गया था. हर वक्त एक ही रट कि भारत वापस लौट जाऊँ मगर बच्चे अपने कैरियर की बीच राह में थे. ऐसे में मार्च २००६ में हिन्दी ब्लॉगजगत से जुड़ा. ऐसा लगा अपने देश और अपने लोगों के बीच पहुँच गया. भारत को जो मिस किया करता था वो कमी ब्लॉग ने पूरी करना शुरु कर दी और मैं डिप्रेशन से बाहर न सिर्फ निकल आया बल्कि इतने नये संबंध बने, इतने नये लोगों से मिला और जुड़ा कि जीवन का अर्थ ही बदल गया. हिन्दी ब्लॉगिंग का मेरे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है. लोग मुझे लाख कोसें टिप्पणी देने और हिन्दी ब्लॉग के विकास के प्रयास में, मगर मैं इस प्लेटफार्म का सदैव आभारी रहूँगा और अपने भरसक इसके विकास के लिए प्रयास करता रहूँगा. शायद मुझ जैसे ही किसी के जीवन में यह सार्थक परिवर्तन ले आये तो मेरा प्रयास सफल मानूँगा.
(२१) अपनी कोई पसंदीदा रचना की कुछ पंक्तियाँ सुनाएँ : (यदि आप चाहें तो यहाँ ऑडियो/विडिओ का प्रयोग भी कर सकते हैं )

(२२) बहुत बढ़िया समीर जी, आपने इस अवसर बहुत बढ़िया कविता सुनाई ...यदि संभव हो तो एक और कविता सुनाएँ
जरूर, सुनिए यह कविता शीर्षक है चाँद


बहुत बहुत धन्यवाद समीर जी, आपने अपना बहुमूल्य समय दिया ब्लोगोत्सव को .....इस अवसर पर ऋग्वेद की दो पंक्तियां आपको समर्पित है कि - ‘‘आयने ते परायणे दुर्वा रोहन्तु पुष्पिणी:। हृदाश्च पुण्डरीकाणि समुद्रस्य गृहा इमें ।।’’अर्थात आपके मार्ग प्रशस्त हों, उस पर पुष्प हों, नये कोमल दूब हों, आपके उद्यम, आपके प्रयास सफल हों, सुखदायी हों और आपके जीवन सरोवर में मन को प्रफुल्लित करने वाले कमल खिले।


आपका भी धन्यवाद हिंदी चिट्ठाकारी में एक नयी पहल के लिए
प्रस्तुति: रवीन्द्र प्रभात

19 comments:

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 3:18 pm

इसी बहाने हमें समीर जी के बारे में काफी कुछ जानने को मिला, एक बार पुन: बधाई।

………….
सपनों का भी मतलब होता है?
साहित्यिक चोरी का निर्लज्ज कारनामा.....

mala ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 3:51 pm

समीर लाल जी को बहुत बहुत बधाईयाँ।

गीतेश ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 3:52 pm

बहुत बहुत बधाईयाँ।

M VERMA ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 5:07 pm

समीर जी को हार्दिक बधाई.

खुशदीप सहगल ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 6:18 pm

गुरु ब्रह्मा, गुरुर विष्णु,
गुरु देवो महेश्वारहा,
गुरु साक्षात परा ब्रह्मा,
तसमई श्री गुरुवाए नमा...

Guru is verily the representative of Brahma, Vishnu and Shiva. He creates, sustains knowledge and destroys the weeds of ignorance. I salute such a Guru.

गुरु को बधाई देने जैसी मेरी औकात नहीं...क्योंकि गुरु तो प्रकाश है, जो आलोकित करता है, इसलिए गुरु की सिर्फ वंदना ही की जा सकती है...

जय हिंद...

girish pankaj ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 7:14 pm

badhai...sameer ji ko..dil se...

प्रमोद ताम्बट ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 9:32 pm

समीर जी को बहुत बहुत बधाईयाँ।

shikha varshney ने कहा… 14 अगस्त 2010 को 9:38 pm

बहुत बहुत बधाई समीर जी !

वाणी गीत ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 5:37 am

हिंदी ब्लॉगिंग में समीर जी के योगदान पर किसे संदेह होगा ...
बहुत बधाई व शुभकामनायें ..!

उन्मुक्त ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 10:33 am

मेरी तरफ से बधाई।

निर्मला कपिला ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 10:58 am

समीर जी की प्रतिभा के बारे मे बहुत सी नयी जानकारियाँ मिली नमन है उनके उत्साह को। आपका भी धन्यवाद। सब को स्वतंत्रता दिवस कि ढेर सारी शुभकामनाएँ

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 12:35 pm

समीर लाल जी को बहुत बहुत बधाई

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 2:18 pm

वाह जी बल्ले बल्ले मुबारकां

मनोज कुमार ने कहा… 15 अगस्त 2010 को 8:31 pm

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आप एवं आपके परिवार को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ!

आशु ने कहा… 16 अगस्त 2010 को 2:09 am

sameer ji,

Bahut Bahut badhyaee ho aap ko !

aashoo

राम त्यागी ने कहा… 16 अगस्त 2010 को 7:44 am

बहुत बहुत बधाई समीर जी !!

Udan Tashtari ने कहा… 27 अगस्त 2013 को 6:41 am

हद हो गई...हमें पता ही न था...:)

 
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