मुरैना , ग्वालियर और मध्य प्रदेश के विभिन्न गावों और शहरों में बचपन और विद्यार्थी जीवन के अनमोल वर्ष गुजारने के बाद श्री राम त्यागी दिल्ली , सिंगापुर जैसे अन्य महानगरो और देशो से गुजरते हुए आजकल अमेरिका के शिकागो के पास के एक कस्बे में कुछ सालो से डेरा डाले हुए हैं . ये नौकरी को मेहनत और लगन से कर रहे हैं पर इनका मन कहता है कि जल्दी से छोड़ो कुछ और शार्थक करो, इनका स्वच्छ राजनीतिक जीवन जीने का सपना है और लोगो के बीच रहकर उनके लिए काम कराने की तमन्ना है, लिखने और पढ़ने में (विशेषकर भारत के बारे में) बहुत लगाव है, इसलिए ब्लॉग की दुनिया में ये आपके साथ हैं .ये संयुक्त परिवार से आते हैं इसीलिए हिन्दी, हिंदुस्तान और भारतीय संस्कृति से इन्हें वेहद लगाव है. इनका व्यक्तिगत ब्लॉग है मेरी आवाज ,कविता संग्रह,My Notes आदि । प्रस्तुत है पर्यावरण से संवंधित इनका एक सारगर्भित आलेख-

!! ज्वलंत मुद्दा : प्रकृति से खिलवाड़ !!



२०१० अमेरिका में याद रहेगा गल्फ ऑफ़ मेक्सिको में हो रहे तेल रिसाव के लिए ! भारत में भोपाल के गैस रिसाव काण्ड के अन्याय की चिंगारी पीडितो में तो पहले से ही सुलग रही थी, अब वो राजनीतिक और बौद्धिक बहस के गलियारों में भी रोशन हो रही है।


बी पी कम्पनी हर कोशिस के बाबजूद तेल रिसाव रोकने में सफल नहीं हो पा रही है पर सुकून की बात है की ओबामा खुद कमांड हाथ में लेकर बी पी के पीछे पड़े हैं. जबकि हमारे यहाँ की कोंग्रेस सरकार तब और अब मामले पर पानी फेरने के सिवा कुछ और नहीं कर पायी थी. बी.पी. के शेयर अमेरिकेन मार्केट में लगभग ३० प्रतिशत नीचे आ चुके है, (बेचारे) टोनी हैवर्ड , BP के सीईओ (फोटो में ) की हालत पतली हो रही है, होनी भी चाहिए!!
बहुत पहले ऐसा ही हादसा अरब जगत में तब हुआ था जब इराक कुवैत से बाहर जाते जाते काफी सारे तेल के कुँओं में आग लगा गया था. तब इसी तरह समुन्दर में आयल का हजारों बैरल रिसाव हुआ था, समुन्दर किनारे तेल की मोटी परत जम गयी थी और समुंदरी जीव जन्तुओं पर इसका बहुत बुरा असर हुआ था।


जहाँ तक मेरा ज्ञान है तेल भारी होने की वजह से समुन्द्र की लहरों को आने जाने से रोक या दबा देता है और समुंदरी पक्षी तेल की इस भरी परत की वजह से सांस लेने और तैरने में परेशानी अनुभव करते हैं. लग रहा है ये तेल कम्पनियां जो हर साल बिलियन डॉलर फायदे के बक्से में डालती है, पुरानी घटनाओं और प्रकृति के संरक्षण के प्रति जान बूझकर अनजान रहती हैं, और हर जगह राजनीतिक लोग इनसे चंदे या टेबल के नीचे पैसा लेकर इनको ऐसा करने देते है. पर प्रकृति के साथ खिलवाड़ कब तक इन कंपनियों को फायदा करता रहेगा ? BP का ये केस इस दिशा में एक अंगड़ाई भर है...आगे पता नहीं क्या होगा !


मेरी ये कविता मेरे भाव शायद बयाँ कर सके ...

BP के बिलियन हुए खाली
पर समुन्दर में तेल अभी भी रिसना है जारी
प्रकृति से छेड़खानी इसको पड़ी भारी
इधर उधर मुंह अब ये ताके अनाड़ी
नए तरीके उर्जा के अपना लो मेरे भाई
नहीं तो ये प्रलय की हुंकार होगी कसाई

प्रकृति से खिलवाड़ हो और मानव प्रयास कुछ असर करें, आशा गौण ही लगती है, इसलिए ईश्वर से प्रार्थना है की भोपाल के पीड़ितों को जल्दी ही न्याय मिले और BP की ये आग भी जल्दी बुझे !!

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4 comments:

mala ने कहा… 4 सितंबर 2010 को 4:01 pm

सार्थक विमर्श !

पूर्णिमा ने कहा… 4 सितंबर 2010 को 4:07 pm

इस पर मैं यही कहूंगी क्या बात है?

गीतेश ने कहा… 4 सितंबर 2010 को 4:49 pm

गंभीर विमर्श को जन्म देता आलेख

राम त्यागी ने कहा… 9 सितंबर 2010 को 7:20 am

धन्यवाद ब्लागोत्सव टीम !!

 
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